किशोर कुमार महज एक गायक नहीं थे, बल्कि कला के संपूर्ण संस्थान थे - मध्यप्रदेश राज्य मंत्री धर्मेंद्र लोधी

एन.एस.बाछल, 05 अगस्त, भोपाल।

संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक धरोहरों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि किसी भी समाज की सांस्कृतिक चेतना तभी जीवित रहती है जब वह नई पीढ़ी को अपने महान पुरुषों और कलाकारों के अमूल्य योगदान से अवगत कराती रहती है। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए संस्कृति विभाग भारतीय सिनेमा के शिखर माने जाने वाले दिवंगत किशोर कुमार की स्मृति में लगातार दस वर्षों से संगीत संध्या का आयोजन कर रहा है। राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी रवींद्र भवन में आयोजित संगीत संध्या 'ये शाम मस्तानी' को संबोधित कर रहे थे। राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि यह आयोजन मात्र एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भारतीय फिल्म संगीत की अमूल्य विरासत को श्रद्धांजलि है, जिसने दशकों से लाखों श्रोताओं को अपने सुरों और भावों से मंत्रमुग्ध किया है।

राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि मध्य प्रदेश की यह पवित्र भूमि कई महान विभूतियों की जन्मभूमि और कार्यस्थल रही है। हमें गर्व है कि इस धरती ने भारतीय सिनेमा को ऐसा अद्वितीय कलाकार दिया है, जिसकी प्रतिभा का वर्णन किसी एक परिचय से नहीं किया जा सकता। किशोर कुमार मात्र एक पार्श्व गायक नहीं थे, बल्कि वे स्वयं में एक संपूर्ण कला संस्थान थे। उनकी आवाज में भावों की ऐसी अद्भुत विविधता थी, जो सहजता से प्रेम, क्रोध, हंसी, करुणा, उत्साह और जीवन दर्शन को व्यक्त करती थी। राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने संस्कृति निदेशक एन.पी. नामदेव और उप निदेशक डॉ. पूजा शुक्ला के साथ दीप प्रज्वलित करके संगीतमय संध्या का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने एलएनसीटी समूह के 'आगाज़ बैंड' और सेज विश्वविद्यालय के बैंड के प्रतिभाशाली युवाओं को प्रमाण पत्र प्रदान करके अंतर-महाविद्यालय संगीत प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित भी किया।

जाने-माने संगीत निर्देशक और गायक अनु मलिक और 'के फॉर किशोर' पुरस्कार विजेता प्रसिद्ध गायक अनिल श्रीवास्तव का दर्शकों ने हार्दिक स्वागत किया। 'इस सुरमई शाम' का संगीत प्रसिद्ध संगीतकार अनु मलिक ने तैयार किया है। भोपाल को तहज़ीब का शहर बताते हुए उन्होंने संस्कृति विभाग को धन्यवाद दिया और किशोर दा को याद करते हुए अपने लोकप्रिय गीत "ये काली-काली आएं..." से गायन की शुरुआत की। उन्होंने "एक गरम चाय की प्याली हो", "जवानी फिर ना आए" और "ऊंची है बिल्डिंग" जैसे जोशीले गीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद गायक अनिल श्रीवास्तव ने मंच संभाला और "ये शाम मस्तानी..." शीर्षक गीत से कार्यक्रम का समापन किया। उन्होंने "रिमज़िम गिरे सावन", "एक अजनबी हसीना से", "मेरे सामान वाली खाखी में", "ये जो मोहब्बत है" और "सलाम-ए-इश्क" जैसे सदाबहार गीतों से भोपाल के संगीत प्रेमियों को मोहित कर दिया।

इस संगीतमय संध्या की विशेष उपलब्धि युवा प्रतिभाओं की ऊर्जावान भागीदारी थी। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित अंतर-महाविद्यालय संगीत प्रतियोगिता के माध्यम से भोपाल की युवा प्रतिभाओं को यह प्रतिष्ठित मंच प्रदान किया गया। सेज यूनिवर्सिटी बैंड ने "हाल क्या है दिलों का", "हम तुमसे प्यार कितना", "ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे" और "ओम शांति ओम" को नए अंदाज में प्रस्तुत किया। वहीं, एलएनसीटी के 'आगाज़ बैंड' ने "बचना ऐ हसीनों", "नीले-नीले अंबर पर", "मेरे सपनों की रानी" और "ओ मेरे दिल के चैन" जैसे क्लासिक गीतों की धमाकेदार प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। किशोर दा के गीतों का आनंद इस सांस्कृतिक उत्सव में उपस्थित संगीत प्रेमियों ने उठाया, जो देर रात तक चला।

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