नए श्रम कानूनों से श्रमिकों को अधिक लाभ मिलेगा-श्रम मंत्री मध्यप्रदेश
एन.एस.बाछल, 02 जुलाई, भोपाल।
नए श्रम कानूनों का निर्माण श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। नियमों को इस प्रकार परिभाषित किया जाना चाहिए कि हमारे श्रमिक भी उन्हें आसानी से समझ सकें। इन्हें और अधिक सरल, व्यावहारिक और श्रम-मुक्त बनाया जाना चाहिए। यह बात पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने विकास भवन में क्षेत्र के नए श्रम कानूनों के प्रस्तावित राज्य नियमों की समीक्षा करते हुए कही। मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नए श्रम कानूनों का उद्देश्य श्रमिकों को अधिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना और श्रमिक एवं नियोक्ता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने श्रम कल्याण बोर्डों और विभिन्न बोर्डों की संरचना में श्रम क्षेत्रों में कार्यरत अनुभवी श्रमिकों को शामिल करने का निर्देश दिया। उन्होंने समूह बीमा योजना के नियमों को इस प्रकार बनाने पर जोर दिया कि असंगठित श्रमिकों को अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने संबल योजना का दायरा बढ़ाने का भी निर्देश दिया ताकि अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों को लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के अंशदान में सरकार या नियोक्ता की भागीदारी से योजनाओं का कार्यान्वयन आसान और अधिक प्रभावी होगा। मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने प्रस्तावित नियमों में कुछ प्रावधानों को अधिक स्पष्ट और संवेदनशील बनाने पर जोर दिया। बीमा न्यायालय, अर्ध-न्यायिक प्रणाली और श्रमिकों को समय पर न्याय दिलाने के विभिन्न प्रावधानों की कार्यप्रणाली पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी और न्यूनतम वेतन निर्धारण के संबंध में मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि कृषि श्रमिकों की कार्यकुशलता, बाजार की वास्तविक स्थिति और विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में प्रचलित मजदूरी दरों का उचित अध्ययन करने के बाद ही व्यावहारिक निर्णय लिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए मजदूरी निर्धारण प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। कार्यरत पत्रकारों से संबंधित विशेष प्रावधानों पर चर्चा करते हुए मंत्री श्री पटेल ने कहा कि कोई भी निर्णय लेने से पहले पत्रकार संगठनों और उनके प्रतिनिधियों से संवाद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुना जाना चाहिए और उनके हितों के अनुरूप नियम बनाए जाने चाहिए।
मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिकों के ऑनलाइन पंजीकरण के लिए एक डिजिटल पोर्टल विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिकों का सटीक डेटाबेस तैयार करने से उनके हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उन्होंने पंचायत सचिवों और नगर निकायों के वार्ड स्तरीय अधिकारियों की उत्तरदायित्व और जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए। श्रमिकों की दुर्घटनाओं की तत्काल सूचना और सहायता के लिए एक सक्रिय पोर्टल और टोल-फ्री हेल्पलाइन विकसित करने के निर्देश भी दिए गए। कार्यस्थलों पर ट्रांसजेंडर और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभ स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान से संबंधित प्रावधानों को स्पष्ट रूप से शामिल करने पर भी बल दिया गया। पर्यवेक्षक प्रणाली के स्थान पर सुविधाकर्ता आधारित प्रणाली के प्रभावी कार्यान्वयन पर भी चर्चा की गई।
बैठक में विभाग के सचिव रघुराज राजेंद्रन ने नए श्रम संहिताओं के प्रमुख प्रावधानों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को शामिल करते हुए चार नई श्रम संहिताएं तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य अधिसूचना आधारित पंजीकरण प्रणाली को बढ़ावा देना, नियोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच बेहतर संबंध स्थापित करना और उद्योगों को अनुकूल कार्य वातावरण प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि नई प्रणाली में प्रौद्योगिकी आधारित पंजीकरण, संस्थानों के लिए 24x7 परिचालन सुविधा, अलग बीमा न्यायालय, अपीलीय प्राधिकरण, राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी, असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा प्रावधान, निश्चित अवधि के कर्मचारियों के लिए एक वर्ष की सेवा पर ग्रेच्युटी की पात्रता और मेहनती पत्रकारों और अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिकों से संबंधित नए प्रावधान शामिल हैं। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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