02/07/26

विधानसभा केवल भवन नहीं बल्कि लोकतंत्र का जीवंत मंच बने- राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष

एन.एस.बाछल, 02 जुलाई, जयपुर।

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने वाला भवन नहीं बल्कि लोकतंत्र का जीवंत केंद्र और जनता से सीधे जुड़ा संस्थान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद उनका सबसे बड़ा उद्देश्य सदन को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनसरोकारों से जुड़ा बनाना रहा है। इंडिया न्यूज के 'मंच जयपुर' कार्यक्रम में उन्होंने विधानसभा की कार्यप्रणाली में किए गए विभिन्न सुधारों और नवाचारों की जानकारी साझा की। 

वासुदेव देवनानी ने कहा कि जब वे पहली बार विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे थे, तभी उनके मन में यह विचार था कि कार्यपालिका विधानसभा के प्रति अधिक जवाबदेह होनी चाहिए। साथ ही विधानसभा का आम जनता, विशेषकर युवाओं से भी सीधा जुड़ाव होना चाहिए। इसी सोच के तहत यूथ पार्लियामेंट जैसे कार्यक्रम शुरू किए गए ताकि युवा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझें और उन्हें यह विश्वास मिले कि वे भी भविष्य में इस सदन का हिस्सा बन सकते हैं। 

नवनिर्वाचित विधायकों के लिए शुरू किया ओरिएंटेशन कार्यक्रम- 

वासुदेव देवनानी ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा चुनाव में लगभग आधे विधायक नए चुनकर आते हैं। ऐसे में सदन की प्रक्रिया, नियमों और संसदीय परंपराओं की जानकारी देना आवश्यक होता है। इसी उद्देश्य से पहली बार दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिससे नए विधायकों को विधानसभा की कार्यप्रणाली समझने में सुविधा मिले और वे प्रभावी ढंग से अपनी भूमिका निभा सकें। 

प्रश्नों के समयबद्ध जवाब पर विशेष जोर- 

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि विधायक केवल प्रश्न लगाकर सदन से बाहर न जाएं बल्कि उन्हें समय पर जवाब भी प्राप्त हों। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष का पद संभाला था, पिछली विधानसभा के करीब पांच हजार प्रश्नों के उत्तर लंबित थे। इसके बाद व्यवस्था में सुधार करते हुए यह तय किया गया कि एक सत्र के सभी प्रश्नों के उत्तर अगले सत्र के शुरू होने से पहले उपलब्ध करा दिए जाएं।  पिछले विधानसभा सत्र में 97 प्रतिशत प्रश्नों के उत्तर समय पर उपलब्ध कराए गए। वहीं वर्तमान सत्र के लगभग 65 प्रतिशत प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त हो चुके हैं और अगले सत्र के शुरू होने से पहले शत-प्रतिशत उत्तर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस विषय की वे स्वयं अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठक करते हैं। 

ब्यूरोक्रेसी को अधिक जवाबदेह बनाने का प्रयास- 

वासुदेव देवनानी ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के दौरान संबंधित विभाग के अधिकारियों की सदन में उपस्थिति सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है ताकि सदस्यों के प्रश्नों का प्रभावी उत्तर दिया जा सके। 

सदन में गतिरोध नहीं, संवाद हो- 

विधायिका और न्यायपालिका के बीच संबंधों पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि जहां चर्चा होती है, वहां मतभेद और विवाद होना स्वाभाविक है लेकिन लोकतंत्र की मजबूती संवाद से आती है। विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका ऐसे विवादों का समाधान निकालने की होती है। जब भी सदन में गतिरोध की स्थिति बनती है, वे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को अपने कक्ष में बुलाकर बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी हमेशा कोशिश रहती है कि विधानसभा की कार्यवाही अधिकतम दिनों तक चले। राजस्थान विधानसभा के प्रत्येक सत्र को लगभग 30 से 32 दिनों तक संचालित करने का प्रयास किया जाता है, जिससे जनहित के मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा हो सके। विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण यूट्यूब के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे आम नागरिक भी सदन की कार्यवाही देख सकें। 

पूरक प्रश्नों की बेहतर तैयारी के लिए नई व्यवस्था-

 विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि अब ऐसी व्यवस्था की गई है कि संबंधित विधायक को प्रश्न का उत्तर एक दिन पहले रात में ही उपलब्ध करा दिया जाता है। इससे सदस्य अगले दिन सदन में पूरक प्रश्नों की बेहतर तैयारी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित सदस्य दो पूरक प्रश्न पूछ सकता है, जबकि उसके बाद नेता प्रतिपक्ष को भी पूरक प्रश्न पूछने का अवसर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रहती है कि अधिक से अधिक विधायक पूरी कार्यवाही के दौरान सदन में उपस्थित रहें और अब लगभग 50 प्रतिशत सदस्य सत्र समाप्त होने तक सदन में बने रहते हैं। 

पेपरलेस विधानसभा और डिजिटल नवाचारों पर जोर- 

वासुदेव देवनानी ने कहा कि विधानसभा में कई महत्वपूर्ण डिजिटल सुधार किए गए हैं। विधानसभा को पूरी तरह पेपरलेस बनाया गया है। समिति बैठकों में डिजिटल हस्ताक्षर (डिजिटल सिग्नेचर) की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनी है। उन्होंने बताया कि विधानसभा संग्रहालय (म्यूजियम) देखने की पास व्यवस्था को भी ऑनलाइन करने की योजना पर काम चल रहा है। अब तक करीब 45 हजार लोग विधानसभा संग्रहालय का अवलोकन कर चुके हैं। इसके अलावा विधानसभा परिसर में संविधान गैलरी विकसित की गई है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक विरासत को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। परिसर में  आकर्षक वाटिकाओ का भी विकास किया गया है। वासुदेव देवनानी ने कहा कि विधानसभा में किए जा रहे इन सुधारों का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, जवाबदेह और जनता के प्रति उत्तरदायी बनाना है, ताकि लोकतंत्र में आम नागरिक की भागीदारी और विश्वास दोनों मजबूत हो सकें। 

विधानसभा के 75 वर्ष पर होंगे कई कार्यक्रम-

 इस अवसर पर वासुदेव देवनानी ने बताया कि राजस्थान विधानसभा का यह 75वां वर्ष है। इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए वर्षभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विधानसभा की 75 वर्षों की लोकतांत्रिक यात्रा को संजोने के लिए विधानसभा की डायरी में दुर्लभ चित्रों और महत्वपूर्ण घटनाओं के माध्यम से विधानसभा के विकास, परंपराओं और ऐतिहासिक पड़ावों को प्रदर्शित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हीरक जयंती वर्ष के कार्यक्रमों की श्रृंखला में वर्तमान और पूर्व विधायकों को आमंत्रित कर विशेष आयोजन किए जाएंगे, ताकि लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय अनुभवों का साझा मंच तैयार हो सके। वासुदेव देवनानी ने कहा कि इन समारोहों में देश के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों की भी भागीदारी रहेगी। एक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि दूसरे कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष की उपस्थिति प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों का उद्देश्य विधानसभा की गौरवशाली संसदीय परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक सशक्त करना है।

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