'विकसित भारत' का संकल्प एक राष्ट्रीय संकल्प है, जिसमें सभी को सहयोग करना होगा: लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला
अभिकान्त, 08 जून चंडीगढ़ : लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज कहा कि 'विकसित भारत' का संकल्प एक राष्ट्रीय संकल्प है, जिसमें देश के प्रत्येक नागरिक और संस्था को सहयोग करना होगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस संकल्प को साकार करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि हमारी नीतियाँ, योजनाएँ, कार्यक्रम और बजटीय प्रावधान समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले हों। हमें सामाजिक परिवर्तन की गति को तेज करना है, नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करना है और समाज को एक प्रगतिशील दिशा देनी है। उन्होंने कहा कि विधायकों की इस संकल्प की प्राप्ति में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि विधायक अपने क्षेत्रों में नीतियों और जनकल्याणकारी पहलों के माध्यम से धरातल पर परिवर्तन लाने के सबसे प्रभावी माध्यम होते हैं।
बिरला ने यह उद्गार चंडीगढ़ स्थित हरियाणा विधान सभा के चैम्बर में कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) इंडिया रीज़न ज़ोन-II (नॉर्थ ज़ोन) कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करते हुए व्यक्त किए। इस गरिमामयी अवसर पर राज्य सभा के उप सभापति हरिवंश, हरियाणा के मुख्य मंत्री नायब सिंह, हरियाणा विधान सभा के अध्यक्ष श्री हरविन्द्र कल्याण, हरियाणा सरकार के संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा सहित राज्य सरकार के अन्य मंत्री और विधान सभा सदस्य उपस्थित रहे।
21वीं सदी के इस दशक को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए श्री बिरला ने कहा कि आज वैश्विक परिदृश्य में बड़े बदलाव हो रहे हैं और दुनिया अनेक प्रकार के तनावों से गुज़र रही है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भी भारत एक स्थिर, मजबूत और सुदृढ़ कानूनी ढाँचे वाले सुशासन के साथ अपनी दीर्घकालिक नीतियों और योजनाओं के बल पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि दुनिया के विकसित देशों में हो रहे परिवर्तनों का बारीकी से अध्ययन करते हुए भारत ने अपनी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप समय-समय पर आवश्यक और व्यावहारिक बदलाव किए हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर नई आशा और असीम संभावनाओं के साथ देख रही है, इसलिए यह समय सामूहिक प्रयासों और व्यापक सहभागिता का है।
लोक सभा अध्यक्ष ने आह्वान किया कि देश में ऐसा जनआंदोलन खड़ा होना चाहिए जिससे प्रत्येक नागरिक यह महसूस कर सके कि विकसित भारत के निर्माण में उसका भी अमूल्य योगदान है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि जब समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चित होगी, तब भारत की सामूहिक शक्ति और विशेष रूप से हमारी युवाशक्ति इतनी सुदृढ़ हो जाएगी कि हम वर्ष 2047 से पहले ही 'विकसित भारत' के संकल्प को सिद्ध कर लेंगे। इस संदर्भ में उन्होंने उल्लेख किया कि कभी हमारी बढ़ती जनसंख्या को एक चुनौती माना जाता था, लेकिन आज वही युवा आबादी हमारी सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है। इसके लिए हमें अपने युवाओं को कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार (Innovation) के लिए तैयार करना होगा। उन्होंने यह महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया कि हमारे विधानमंडलों में बनने वाली नीतियाँ और कानून नई पीढ़ी की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं के अनुरूप होने चाहिए।
संसदीय लोकतंत्र में जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए बिरला ने कहा कि जनसंवाद और सार्थक चर्चाओं के माध्यम से नागरिकों में यह विश्वास पैदा होना चाहिए कि यह सदन उनका अपना है और जनप्रतिनिधि उनकी वास्तविक आवाज़ हैं। इसलिए सदनों में होने वाली चर्चाएँ, नीतियाँ और कानून सदैव राष्ट्रहित से प्रेरित होने चाहिए और उनमें जनता की सहभागिता बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि जितनी अधिक जनभागीदारी होगी, सामाजिक परिवर्तन उतना ही व्यापक और गहरा होगा। लोकतांत्रिक संस्थाओं में जुड़ाव जितना बढ़ेगा, विकसित भारत का सपना उतनी ही तेजी से साकार होगा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि चाहे ग्राम पंचायत हो, पंचायत समिति हो, जिला परिषद हो, नगर पालिका हो, विधानसभा हो या लोकसभा—लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में जनभागीदारी बढ़ने से नए विचार, विविध दृष्टिकोण और रचनात्मक सुझाव सामने आते हैं, जिससे विकास की गति को नई ऊर्जा मिलती है।
बिरला ने आगे कहा कि किसी भी राज्य का कानूनी ढाँचा जितना पारदर्शी और मजबूत होगा, वह राज्य उतनी ही तीव्र गति से प्रगति करेगा। जहाँ नीतियाँ स्पष्ट होती हैं, कानून न्यायसंगत होते हैं और शासन स्थिर व मजबूत होता है, वहाँ निवेश की संभावनाएँ स्वतः बढ़ जाती हैं। निवेशक हमेशा वहीं आते हैं जहाँ उन्हें नीति और कानून की निरंतरता पर पूर्ण विश्वास होता है; अतः इसे सुदृढ़ बनाए रखना हमारी एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस दो दिवसीय सम्मेलन की कार्यवाही के दौरान 'विकसित भारत के संकल्प', 'जनभागीदारी', 'जनआंदोलन' और 'सामूहिक उत्तरदायित्व' जैसे गंभीर विषयों पर सार्थक और परिणामोन्मुखी चर्चा होगी।
इस दो दिवसीय CPA इंडिया रीज़न ज़ोन-II (नॉर्थ ज़ोन) कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में देश के 12 राज्यों की विधायिकाओं के पीठासीन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसमें सीपीए ज़ोन–II के सदस्य प्रदेशों—हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली—की विधायिकाओं के पीठासीन अधिकारियों के अतिरिक्त अन्य राज्यों, जैसे—मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, उत्तर प्रदेश सिक्किम और पश्चिम बंगाल की विधायिकाओं के पीठासीन अधिकारियों ने भी सहभागिता की।
सम्मेलन के विभिन्न पूर्ण सत्रों में 'भविष्य की चुनौतियों और विकसित भारत–2047 के लक्ष्य को साकार करने में जागरूक समाज एवं जनप्रतिनिधियों की भूमिका' विषय पर विस्तृत विमर्श किया जा रहा है।
कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन से पूर्व, लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हरियाणा विधानसभा भवन में नवस्थापित 'पार्लियामेंट्री रिसर्च एंड इन्फ़ॉर्मेशन सेंटर' (PRIC) का भी उद्घाटन किया, जो विधायी कार्यों की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।
सम्मेलन के प्रथम दिन, लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राजभवन में हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष से शिष्टाचार भेंट भी की और विभिन्न समसामयिक विषयों पर चर्चा की।
इस सम्मेलन में सभी प्रतिनिधियों के आवागमन की व्यवस्था ई-बसों के माध्यम से की गई है। लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला उद्घाटन सत्र के समापन के बाद प्रतिनिधियों के साथ ई-बस में रवाना हुए।
विकसित भारत केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय अभियान : उपसभापति हरिवंश
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति में जागरूक समाज और जनप्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष बल दिया। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला के उस दूरदर्शी प्रयास की सराहना की, जिसके तहत पहली बार सीपीए इंडिया को नौ जोनों में विभाजित कर संसदीय संवाद को अधिक सक्रिय, नियमित और व्यवस्थित बनाया गया है।
हरिवंश ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब देश के सभी क्षेत्रों का संतुलित और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि उत्तर क्षेत्र के राज्यों का इस लक्ष्य की प्राप्ति में विशेष योगदान है। पंजाब और हरियाणा देश के कुल गेहूं उत्पादन में लगभग एक-चौथाई योगदान देकर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के मजबूत स्तंभ बने हुए हैं। देश के कुल भू-भाग का मात्र 1.3 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद हरियाणा राष्ट्रीय जीडीपी में 3.6 प्रतिशत का योगदान दे रहा है।
उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा राज्य को ‘1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ बनाने के लक्ष्य तथा नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 2000 करोड़ रुपये के फंड के साथ स्थापित देश के पहले ‘डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर’ की विशेष रूप से सराहना की।
भविष्य की जटिल तकनीकी एवं पर्यावरणीय चुनौतियों का उल्लेख करते हुए
उपसभापति ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को तात्कालिक राजनीतिक चिंताओं से ऊपर उठकर दीर्घकालिक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि समाज और विधायकों को मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, पराली प्रबंधन, जल संकट तथा तीव्र शहरीकरण जैसी उभरती चुनौतियों का सामना साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण (एविडेंस-बेस्ड पॉलिसीमेकिंग) और विशेषज्ञों के साथ निरंतर संवाद के माध्यम से करना होगा।
उन्होंने कहा कि हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली तथा जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य और केंद्रशासित प्रदेश विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन क्षेत्रों ने कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और खेलों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
हरिवंश ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने डिजिटल प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान, स्टार्टअप, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की हैं। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आधार, यूपीआई और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी व्यवस्थाओं ने सुशासन, पारदर्शिता और सेवा वितरण को नई दिशा प्रदान की है। आज भारत विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है तथा वैश्विक मंच पर एक विश्वसनीय और सक्षम साझेदार के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा जनप्रतिनिधियों की भूमिका को प्रभावी बनाने के लिए व्यावहारिक और दूरगामी सुझावों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
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