पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट सख्त: कहा - विकास के लिए पर्यावरण से समझौता नहीं; विकल्प न होने पर ही मिलेगी पेड़ काटने की अनुमति
अभिकान्त, 30 मई चंडीगढ़ : पंजाब में विकास परियोजनाओं (इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स) के नाम पर बड़े पैमाने पर हो रही पेड़ों की कटाई के मामलों पर पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। माननीय अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि विकास कार्यों के लिए पर्यावरण के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह कड़ा नियम तय कर दिया है कि भविष्य में पेड़ काटने की अनुमति केवल और केवल उसी स्थिति में दी जाएगी, जब संबंधित विभाग या अधिकारी यह अकाट्य रूप से साबित कर देंगे कि परियोजना को पूरा करने के लिए उनके पास कोई दूसरा व्यावहारिक विकल्प मौजूद नहीं है।
पंजाब में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र को बचाने के उद्देश्य से मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस) शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने पेड़ों की कटाई से जुड़े विभिन्न मामलों और जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए।
शर्तों के साथ मंजूरी:
अदालत ने कुछ बेहद जरूरी और जनहित से जुड़ी परियोजनाओं को बेहद सख्त शर्तों के साथ आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है, ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे।
अधिकारियों से मांगा विस्तृत जवाब:
जिन परियोजनाओं के तहत बहुत बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटा जाना प्रस्तावित है, उन पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को नोटिस जारी कर इस संबंध में विस्तृत जवाब और वैकल्पिक योजनाओं की रिपोर्ट तलब की है।
पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब राज्य में सड़कों के चौड़ीकरण या अन्य निर्माण कार्यों के दौरान ग्रीन कवर को बचाने के लिए प्रशासन को नई और पर्यावरण-अनुकूल नीतियों पर काम करना होगा।
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