17/12/25

हाईकोर्ट परिसर में अब मिलेंगी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ; SBI ने दान किए आधुनिक चिकित्सा एवं परिवहन वाहन

चंडीगढ़, 17 दिसम्बर (ए.के. वत्स) : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), रीजनल बिज़नेस ऑफिस-4, चंडीगढ़ ने अपनी कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी पहल के तहत न्यायपालिका के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए एक सराहनीय कदम उठाया है। बैंक की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को एक आधुनिक एम्बुलेंस और तीन इलेक्ट्रिक कार्ट (ई-कार्ट) भेंट की गईं। इस दान का मुख्य उद्देश्य हाईकोर्ट परिसर में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करना और पर्यावरण अनुकूल आवाजाही को बढ़ावा देना है। यह पहल न केवल कर्मचारियों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी, बल्कि परिसर में आने वाले आगंतुकों और वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा में भी विस्तार करेगी।

इस विशेष दान समारोह की गरिमा हाईकोर्ट और बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने बढ़ाई। कार्यक्रम में माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति विकास बहल और न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। एसबीआई की ओर से महाप्रबंधक नीरज भारती, उप महाप्रबंधक (पंचकूला) श्री विवेक कुमार और क्षेत्रीय प्रबंधक सुश्री सुभाषिनी राय ने शिरकत की। उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने एसबीआई के इस योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं को सशक्त करने और सतत गतिशीलता (Sustainable Mobility) की दिशा में यह एक अनुकरणीय उदाहरण है।

इस पूरी योजना की परिकल्पना पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट कर्मचारी कल्याण संघ द्वारा की गई थी, जिसका कुशल नेतृत्व अध्यक्ष श्री विनोद धत्तरवाल ने किया। इस पहल को साकार करने में माननीय न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। प्रदान की गई एम्बुलेंस को विशेष रूप से आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए तैनात किया गया है, जबकि तीन ई-कार्ट का उपयोग विशाल हाईकोर्ट परिसर के भीतर आंतरिक परिवहन के लिए किया जाएगा। ये ई-कार्ट प्रदूषण मुक्त होने के साथ-साथ शोर रहित हैं, जो सतत विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति एसबीआई की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

अंत में, बैंक अधिकारियों ने विश्वास दिलाया कि एसबीआई भविष्य में भी सामाजिक कल्याण और संस्थागत सहयोग के ऐसे प्रयासों को जारी रखेगा। यह पहल सामुदायिक कल्याण और सरकारी संस्थाओं के बीच समन्वय का एक सार्थक प्रतीक बनकर उभरी है। इस कदम से हाईकोर्ट परिसर न केवल सुरक्षित हुआ है, बल्कि यह आधुनिक और पर्यावरण-मैत्रीपूर्ण बुनियादी ढांचे की ओर भी एक कदम आगे बढ़ा है।\

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