13/09/25

जमानत और अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 6 महीने की समय सीमा की तय

नई दिल्ली, 13 सितंबर (अभी) : न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने और नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने सभी उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों को आदेश दिया है कि वे जमानत और अग्रिम जमानत की याचिकाओं का निपटारा तीन से छह महीने के भीतर करें। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को सालों तक लंबित नहीं रखा जा सकता।

इस फैसले से उन हजारों विचाराधीन कैदियों को बड़ी राहत मिलेगी, जो अपनी जमानत याचिकाओं पर फैसले का इंतजार करते हुए महीनों और कभी-कभी सालों तक जेल में बिताते हैं। कोर्ट ने कहा कि न्याय में देरी, न्याय से इनकार के समान है और ऐसे में इन अर्जियों का त्वरित निपटारा आवश्यक है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि, अग्रिम जमानत याचिकाओं के लिए पहले निचली अदालत में जाना उचित है, लेकिन यह निर्देश अदालतों पर अनावश्यक बोझ कम करने और मामलों के कुशल प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए है। अधिवक्ताओं ने इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि यह न्याय प्रणाली में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इस आदेश के बाद, उम्मीद है कि जमानत मामलों में लगने वाले समय में कमी आएगी और त्वरित न्याय की अवधारणा को बल मिलेगा।

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