संस्कृत दिवस हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और इस अमूल्य भाषा को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है

संस्कृत दिवस एक विशेष दिन है जो संस्कृत भाषा के महत्व और प्राचीनता को उजागर करने के लिए मनाया जाता है। इसे हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जो आमतौर पर रक्षा बंधन के साथ आती है।

संस्कृत को "देववाणी" या "देवताओं की भाषा" के रूप में जाना जाता है और इसे सभी भारतीय भाषाओं की जननी माना जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य इस महान भाषा को बढ़ावा देना और लोगों को इसके समृद्ध इतिहास, साहित्य और वैज्ञानिक महत्व के बारे में जागरूक करना है।

संस्कृत वेदों, पुराणों, उपनिषदों और अन्य प्राचीन ग्रंथों की भाषा है, जो हमारी संस्कृति और ज्ञान का भंडार हैं।

संस्कृत की व्याकरणिक संरचना इतनी सटीक और व्यवस्थित है कि इसे कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।

यह दिन उन महान ऋषियों और विद्वानों को श्रद्धांजलि देने के लिए भी मनाया जाता है, जिन्होंने संस्कृत साहित्य के विकास में अपना जीवन समर्प

संस्कृत दिवस मनाने की शुरुआत सबसे पहले वर्ष 1969 में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के निर्देश पर हुई थी। इस दिन को श्रावण पूर्णिमा पर इसलिए चुना गया क्योंकि प्राचीन काल में इसी दिन से नए शिक्षण सत्र की शुरुआत होती थी, जिसमें वेद पाठ का आरंभ किया जाता था।

वर्ष 2025 में, संस्कृत दिवस 9 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा।

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