'ई-रक्तकोष' पोर्टल पर पंजीकरण हुआ अनिवार्य, डेटा में हेराफेरी मिलने पर होगा सख्त एक्शन

अभिकान्त, 25 मार्च नई दिल्ली : देश के स्वास्थ्य ढांचे को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक क्रांतिकारी निर्णय लिया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने अब देश के सभी लाइसेंस प्राप्त ब्लड सेंटर्स और ब्लड बैंकों के लिए 'ई-रक्तकोष' पोर्टल पर पंजीकरण करना और दैनिक स्टॉक अपडेट करना अनिवार्य कर दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देशभर में रक्त की उपलब्धता का एक एकीकृत डेटाबेस तैयार करना है, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को भटकना न पड़े और रक्त की अवैध बिक्री या कालाबाजारी को पूरी तरह रोका जा सके।

नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब 'ई-रक्तकोष' पोर्टल को सीधे तौर पर फिजिकल इंस्पेक्शनकी प्रक्रिया से जोड़ दिया गया है। इसका अर्थ है कि जब भी ड्रग इंस्पेक्टर किसी ब्लड बैंक का दौरा करेंगे, तो वे पोर्टल पर दिखाए गए ऑनलाइन डेटा का मिलान वहां मौजूद वास्तविक स्टॉक से करेंगे। यदि पोर्टल पर दर्ज जानकारी और वास्तविक स्टॉक में कोई भी अंतर या हेराफेरी पाई जाती है, तो संबंधित संस्थान के खिलाफ पहली बार इतनी सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस रद्द होना और भारी जुर्माना शामिल हो सकता है।

पारदर्शिता को अगले स्तर पर ले जाने के लिए, अब रक्तदाताओं के रिकॉर्ड को भी 'आभा आईडी' या आधार कार्ड से जोड़ने का प्रावधान किया गया है। इससे पूरी 'ब्लड सप्लाई चेन' को ट्रैक करना संभव होगा। राज्यों की लाइसेंसिंग अथॉरिटी को निर्देश दिए गए हैं कि वे आगामी 30 दिनों के भीतर अपने अधिकार क्षेत्र के सभी ब्लड बैंकों की अनुपालन रिपोर्ट केंद्र को सौंपें। इस डिजिटल निगरानी से न केवल दुर्लभ ब्लड ग्रुप्स की उपलब्धता का पता लगाना आसान होगा, बल्कि एक्सपायरी डेट के कारण होने वाली रक्त की बर्बादी को भी कम किया जा सकेगा।

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