दिल्ली में काशी की तर्ज पर यमुना घाटों के कायाकल्प की तैयारी: यमुना बाजार से तीर्थ पुरोहितों को हटने का नोटिस
अभिकान्त, 07 मई नई दिल्ली : दिल्ली की जीवनदायिनी यमुना नदी के किनारों को अब वाराणसी के गंगा घाटों की तरह दिव्य और भव्य स्वरूप देने की तैयारी शुरू हो गई है। दिल्ली सरकार और जिला प्रशासन ने इस दिशा में बड़े कदम उठाते हुए यमुना बाजार स्थित 30 पक्के घाटों के सौंदर्यीकरण की योजना पर काम तेज कर दिया है।
इसी कड़ी में प्रशासन ने घाटों के किनारे दशकों से बसे पंडा (तीर्थ पुरोहित) परिवारों को वहां से हटने का फरमान सुनाया है। मंगलवार को जारी किए गए आधिकारिक नोटिस में इन परिवारों को अपनी बसावट हटाने के लिए 15 दिन की मोहलत दी गई है।
इस आदेश के बाद घाटों पर छह से सात पीढ़ियों से रह रहे पंडा परिवारों की चिंताएं गहरा गई हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनका यमुना से न केवल गहरा धार्मिक जुड़ाव है, बल्कि उनकी आजीविका भी पूरी तरह से इन्हीं घाटों पर होने वाले कर्मकांडों पर टिकी है।
पुरोहितों ने मांग की है कि यदि विकास कार्य के लिए उन्हें हटाया जाना अनिवार्य है, तो सरकार उन्हें घाट से 300 मीटर के दायरे में रहने के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए। साथ ही, उन्होंने श्रद्धालुओं के पूजा-पाठ और कर्मकांड के लिए घाटों पर उचित स्थान सुरक्षित रखने की भी गुहार लगाई है ताकि उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएं अक्षुण्ण बनी रहें।
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