मानवता के आधार पर मध्य पूर्व युद्ध के बीच हार्मुज में फसे नाविकों के भोजन का इंतजाम करे ईरान

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी गतिरोध के कारण स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। ताज़ा रिपोर्टों (अप्रैल 2026) के अनुसार, हजारों नाविक इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं और उनके सामने भोजन एवं पानी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

इस मानवीय संकट को लेकर वर्तमान स्थिति और उठाए जा रहे कदमों का विवरण नीचे दिया गया है:

लगभग 20,000 नाविक और 3,000 से अधिक जहाज** इस समय खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज के आसपास फंसे हुए हैं।

नाविकों की ओर से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को लगातार संदेश भेजे जा रहे हैं कि उनका ताजा खाना और पीने का पानी खत्म हो चुका है। कई जहाजों पर राशन की भारी किल्लत है और वे **पानी उबालकर पीने** को मजबूर हैं।

नाविक न केवल भूख-प्यास से बल्कि आसपास हो रही बमबारी और हमलों से भी डरे हुए हैं।

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है:

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने जहाजों के गुजरने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। जहाजों को अपनी क्रू लिस्ट, कार्गो विवरण और अन्य दस्तावेज जमा करने पड़ रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद, अभी तक ईरान की ओर से फंसे हुए सभी नाविकों के लिए भोजन की कोई व्यवस्थित और बड़ी मानवीय सहायता की आधिकारिक घोषणा सार्वजनिक नहीं हुई है। हालांकि, ईरान ने कहा है कि वह 'मित्र देशों' के जहाजों की आवाजाही में समन्वय कर रहा है।

इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (ITF) को नाविकों से लगातार मदद के गुहार मिल रहे हैं। उन्होंने सदस्य देशों से नाविकों के कल्याण और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए समन्वय करने की अपील की है।

संयुक्त राष्ट्र की संस्था इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने फंसे हुए जहाजों और नाविकों को निकालने के लिए एक **'सुरक्षित समुद्री गलियारा' (Safe Corridor)** बनाने की मांग की है।

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उनकी स्थिति पर करीब से नजर रखी जा रही है। भारतीय जहाजों को फिलहाल होर्मुज से गुजरने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं बताई गई है।

स्थिति यह है कि जब तक संघर्ष विराम या कोई सुरक्षित मानवीय गलियारा नहीं बनता, तब तक नाविकों तक भोजन पहुँचाना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। मानवीय आधार पर ईरान और अन्य पड़ोसी देशों को इन नाविकों तक बुनियादी रसद पहुँचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की तुरंत आवश्यकता है।

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