दिवाली, जिसे दीपावली भी कहते हैं
दिवाली, जिसे दीपावली भी कहते हैं, भारत का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और लोकप्रिय त्योहार है। यह 'अंधकार पर प्रकाश की विजय', 'बुराई पर अच्छाई की जीत' और 'अज्ञान पर ज्ञान की विजय' का प्रतीक है। यह कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है।
दिवाली से जुड़ी प्रमुख घटनाएं और पौराणिक कथाएँ इस प्रकार हैं:
* भगवान राम का अयोध्या लौटना:
* सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान राम चौदह वर्ष के वनवास और राक्षसराज रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद, अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे।
* अयोध्यावासियों ने अपने प्रिय राजा के लौटने की खुशी में पूरे नगर को घी के दीयों से सजाया था। उस अमावस्या की काली रात दीयों की रोशनी से जगमगा उठी थी। तभी से यह पर्व प्रकाश के उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा।
* देवी लक्ष्मी का अवतरण:
* माना जाता है कि दिवाली के दिन ही समुद्र मंथन के दौरान धन और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं।
* इसलिए, दिवाली के दिन घरों में दीये जलाने के साथ-साथ, सुख-समृद्धि के लिए देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा भी की जाती है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में चुना था।
* भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर का वध:
* एक कथा के अनुसार, दिवाली से एक दिन पहले, जिसे नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली कहते हैं, भगवान कृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया था और उसकी कैद से 16,000 कन्याओं को मुक्त कराया था।
* इस विजय की खुशी में अगले दिन दीप जलाकर उत्सव मनाया गया था।
* महावीर स्वामी का मोक्ष:
* जैन धर्म में, दिवाली का विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर को मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त हुआ था।
* इस ज्ञान के प्रकाश को याद करने के लिए जैन समुदाय के लोग दीये जलाते हैं।
* बंदी छोड़ दिवस (सिख धर्म):
* सिख धर्म में, दिवाली को बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद जी, मुगल कैद से 52 राजाओं के साथ मुक्त होकर अमृतसर लौटे थे।
* उनके स्वागत में श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) को दीपों से सजाया गया था।
दिवाली का पर्व पाँच दिनों तक चलता है, जिनमें ये घटनाएँ अलग-अलग दिनों से जुड़ी हैं:
* धनतेरस (पहला दिन): इस दिन धन के देवता कुबेर और आरोग्य के देवता धन्वंतरि की पूजा होती है।
* नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली (दूसरा दिन): इस दिन भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध का उत्सव मनाया जाता है।
* दीपावली (मुख्य दिन, तीसरा दिन): इस दिन भगवान राम के अयोध्या लौटने और माता लक्ष्मी के अवतरण की घटना से जुड़ी पूजा होती है।
* गोवर्धन पूजा (चौथा दिन): इस दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र के प्रकोप से गोकुलवासियों की रक्षा की थी।
* भाई दूज (पाँचवाँ दिन): यह भाई-बहन के पवित्र प्रेम का त्योहार है, जब बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।
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