12/07/26

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की समाधि निर्माण को केंद्र की मंजूरी; राजघाट के राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर बनेगा स्मारक

अभिकान्त, 12 जुलाई नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने देश के पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न स्वर्गीय प्रणब मुखर्जी की समाधि के निर्माण को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। उनका स्मारक राजघाट परिसर स्थित राष्ट्रीय स्मृति (राष्ट्रीय स्मृति स्थल) परिसर में बनाया जाएगा। गौरतलब है कि प्रणब मुखर्जी का निधन 31 अगस्त 2020 को 84 वर्ष की आयु में दिल्ली में हुआ था। केंद्र सरकार की इस हरी झंडी के बाद स्मारक निर्माण की प्रशासनिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।

इस समाधि निर्माण को लेकर वर्ष 2026 में दिल्ली शहरी कला आयोग (DUAC) ने स्मारक के प्रारूप में कुछ डिजाइन संबंधी संशोधन सुझाए थे। इन सुझावों के आधार पर केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने एक संशोधित प्राथमिक प्रस्ताव तैयार कर डीयूएसी को सौंप दिया है। वर्तमान में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग समाधि के लिए विशेष रूप से बनाए गए ट्रस्ट से आवश्यक बजट मिलने का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद धरातल पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

प्रणब मुखर्जी पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखने वाले पहले ऐसे राष्ट्रीय राजनेता होंगे, जिनकी समाधि राजघाट परिसर में स्थापित की जाएगी। केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार, उनका स्मारक राष्ट्रीय स्मृति परिसर में विकसित होगा, जहाँ पूर्व राष्ट्रपतियों, उपराष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों जैसे देश के शीर्ष दिग्गजों के स्मारक बनाए जाते हैं। गौरतलब है कि पूर्व में कांग्रेस शासनकाल के दौरान अलग-अलग समाधियां बनाने की परंपरा पर रोक लगा दी गई थी। हालांकि, बाद में भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी के भव्य स्मारक बनवाए और अब इसी कड़ी में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की समाधि को भी मंजूरी दी गई है। वर्तमान में राजघाट और उससे जुड़े स्मारकों का यह पूरा परिसर लगभग 245 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1948 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि से हुई थी।

राजघाट परिसर: कब और किसकी बनी समाधि?

    • महात्मा गांधी (1948) – राजघाट

    • जवाहरलाल नेहरू (1964) – शांतिवन

    • लाल बहादुर शास्त्री (1966) – विजय घाट

    • संजय गांधी (1980)

    • इंदिरा गांधी (1984) – शक्ति स्थल

    • जगजीवन राम (1986) – समता स्थल

    • चौधरी चरण सिंह (1987) – किसान घाट

    • राजीव गांधी (1991) – वीर भूमि

    • लालिता शास्त्री (1993)

    • ज्ञानी जैल सिंह (1994) – एकता स्थल

    • शंकर दयाल शर्मा (1999) – कर्मभूमि (यह कांग्रेस शासनकाल में बनी अंतिम समाधि थी, जिसके बाद अलग नीति के तहत रोक लगी थी)

    • पी. वी. नरसिम्हा राव – ज्ञान भूमि (कांग्रेस द्वारा लगाई गई रोक को हटाकर वर्ष 2015 में स्मारक बना)

    • अटल बिहारी वाजपेयी – सदैव अटल (2018)

    • प्रणब मुखर्जी – राष्ट्रीय स्मृति परिसर में समाधि निर्माण स्वीकृत (डिजाइन संशोधन के बाद प्रक्रिया जारी)

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