केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: देश में लागू हुई नई केरोसिन आवंटन नीति, राज्यों को मिली ज्यादा स्वायत्तता
नई दिल्ली, 13 मार्च (अभी) : भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए 'सुपीरियर केरोसिन तेल' के आवंटन के संबंध में एक महत्वपूर्ण आधिकारिक आदेश जारी किया है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 से 2027-28 के लिए एक नई 'PDS केरोसिन आवंटन नीति' लागू की है, जिसके तहत अब 'सब्सिडी' और 'गैर-सब्सिडी' श्रेणियों के अलग-अलग आवंटन को समाप्त कर इसे 'PDS SKO' की एक एकल श्रेणी में बदल दिया गया है। मंत्रालय का यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा बाजारों में जारी अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधानों के बीच घरेलू स्तर पर ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
इस नई नीति के तहत, प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को उनकी पिछली तीन वर्षों की अधिकतम खपत के आधार पर तिमाही आधार पर केरोसिन का कोटा आवंटित किया जाएगा। इस व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि राज्य सरकारों को अब यह पूरी स्वायत्तता दी गई है कि वे आवंटित तेल का उपयोग अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं जैसे कि खाना पकाने, रोशनी, मछली पकड़ने के जहाजों, मेलों, प्रदर्शनियों या प्राकृतिक आपदाओं के समय कर सकें। जो राज्य 'केरोसिन मुक्त' घोषित हो चुके हैं, वहां भी विशेष परिस्थितियों और आपदा प्रबंधन के लिए तेल कंपनियों के माध्यम से स्टॉक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह आवंटन 'एडहॉक' आधार पर किया गया है ताकि किसी भी राज्य में ईंधन की कमी न हो।
प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने वितरण प्रणाली में भी कड़े बदलाव किए हैं। अब राज्यों को आवंटित मात्रा को संबंधित तिमाही (45-90 दिन) के भीतर ही उठाना अनिवार्य होगा और बची हुई मात्रा को अगली तिमाही में ले जाने की अनुमति केवल प्राकृतिक आपदा जैसी आपात स्थितियों में ही मिलेगी। केंद्र ने सख्त चेतावनी दी है कि इस केरोसिन तेल का किसी भी व्यावसायिक कार्य या पेट्रोल-डीजल में मिलावट के लिए उपयोग नहीं होना चाहिए। वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए ई-पॉस (e-POS) मशीनों और बायोमेट्रिक सत्यापन पर जोर दिया गया है। यह पहल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देगी, बल्कि उन क्षेत्रों में रोशनी और ईंधन का संकट दूर करेगी जहाँ अभी भी स्वच्छ ईंधन (LPG) की पहुंच पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो पाई है।
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