भारत ने अप्रैल में डिलीवरी के लिए लगभग 6 करोड़ (60 मिलियन) बैरल रूसी कच्चे तेल खरीदा है

भारत ने हाल ही में रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदा है, जिसकी बड़ी खेप अप्रैल 2026 में भारत पहुँचने वाली है।

भारतीय रिफाइनरियों ने अप्रैल में डिलीवरी के लिए लगभग 6 करोड़ (60 मिलियन) बैरल रूसी कच्चे तेल का सौदा पक्का किया है।

वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया है।

फरवरी के मुकाबले बढ़ोतरी: यह मात्रा फरवरी 2026 में की गई खरीद से दोगुनी से भी अधिक है।

भारत के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण सऊदी अरब और इराक जैसे देशों से तेल की आपूर्ति में बाधा आ रही है। ऐसे में रूस एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।

रूस से मिलने वाला तेल वैश्विक कीमतों (Brent Crude) के मुकाबले रियायती दरों पर मिल रहा है, जिससे भारत को अपनी अर्थव्यवस्था संभालने और महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

भारत अपनी तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है। अप्रैल की यह बड़ी खेप घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि तेल की खरीद पूरी तरह से राष्ट्रीय हित पर आधारित है और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी अन्य देश की अनुमति पर निर्भर न

हीं है।

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