दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को 40 साल पुराने 'कोल्ड मर्डर केस' में मिली बड़ी कामयाबी, हत्यारोपी गिरफ्तार
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (अन्नू): दिल्ली पुलिस की सेंट्रल रेंज क्राइम ब्रांच ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल करते हुए 40 साल पुराने हत्या के मामले को सुलझा लिया है। वर्ष 1986 में शकरपुर थाने (पूर्वी दिल्ली) में दर्ज एफआईआर संख्या 375/1986 के तहत वांछित आरोपी चंद्र शेखर प्रसाद को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी वर्ष 1987 से ही अदालत द्वारा भगोड़ा (absconder) घोषित था और पिछले चार दशकों से पुलिस को चकमा दे रहा था।
मामला और अपराध की पृष्ठभूमि
अक्टूबर 1986 में आरोपी चंद्र शेखर प्रसाद पर अपनी पत्नी की ईंटों से सिर कुचलकर हत्या करने का आरोप था। घटना के समय आरोपी ने अपनी पत्नी पर विवाहेतर संबंधों का संदेह जताया था। हमले के दौरान उसने और उसके साथियों ने घर के घरेलू सहायकों को बंदूक के बल पर बंधक बना लिया था। अपराध को अंजाम देने के बाद से ही आरोपी और उसके सहयोगी फरार हो गए थे।
जांच में पेश आईं चुनौतियां
इस मामले को सुलझाना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि:
घटना के समय आरोपी की उम्र लगभग 40 वर्ष थी, जो अब 84 वर्ष के करीब है ।
उस दौर में डिजिटल कोर्ट रिकॉर्ड का अभाव था।
जांच के लिए कोई आधुनिक पहचान उपकरण जैसे [Aadhaar Redacted] डेटा, मोबाइल डेटा या तस्वीरें उपलब्ध नहीं थीं ।
सफलता की रणनीति और गिरफ्तारी
क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपी के बच्चों को दिल्ली और बिहार में खोज निकाला । इसके बाद तकनीकी निगरानी और फील्ड इंटेलिजेंस के जरिए यह पुष्टि हुई कि आरोपी जीवित है और कभी-कभार धार्मिक या पारिवारिक आयोजनों में शामिल होता है । एक परिवार में शोक संदेश (bereavement) के दौरान उसकी गतिविधियों पर नजर रखी गई और अंततः 22 अप्रैल 2026 को दिल्ली के नंगली पूना (अलीपुर) स्थित एक फैक्ट्री के स्टोररूम से उसे गिरफ्तार कर लिया गया, जहाँ वह अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था ।
चार दशक की फरार जिंदगी
पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि वह पिछले 40 वर्षों में बिहार, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में लगातार ठिकाने बदलता रहा । इस दौरान उसने हरियाणा के एक आश्रम में शरण ली और पंजाब के पटियाला में रिक्शा चालक के रूप में भी काम किया । चंद्र शेखर प्रसाद मूल रूप से 1969 में दिल्ली आया था और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में कंपोजिटर के रूप में कार्यरत था ।
पुलिस उपायुक्त (क्राइम ब्रांच) संजीव कुमार यादव ने कहा कि उनकी टीमें पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, चाहे अपराधी कितने भी समय तक फरार क्यों न रहे।
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