देश करोड़ों अवैध प्रवासियों को नहीं झेल सकता है : उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़
आरएस अनेजा, 03 फरवरी नई दिल्ली।
देश करोड़ों अवैध प्रवासियों को नहीं झेल सकता है। देश में कई स्थानों पर जन सांख्यिकी बदल रही है और चुनावी राजनीति से उसे समर्थन मिल रहा है। यह स्थिति चिंता में डालने वाली है। इसलिए देश के युवा राष्ट्रविरोधी ताकतों का पर्दाफाश करने में जुट जाएं।
यह बात उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने वर्ल्ड फोरम ऑफ एकाउंटेंट्स (डब्ल्यूओएफए) के सम्मेलन में कही है। इस दौरान राज्यसभा के सभापति की हैसियत से धनखड़ ने संसद की कार्यवाही के लगातार बाधित होने पर चिंता जताई।
धनखड़ ने कहा कि युवा देश के सामने खड़ी चुनौतियों को समझें और उनसे निपटने के लिए एकजुट होकर आगे आएं। उप राष्ट्रपति ने कहा, समझदार को इशारा काफी है, इसलिए युवा समझ जाएं कि उन्हें सुरक्षित भविष्य के लिए क्या करना है।
धनखड़ ने कहा, कुछ लोग देश की विकास की यात्रा को बाधित करना चाहते हैं। वे भारतीयता को भूलकर बातें करते हैं, तरह-तरह के दुष्प्रचार कर रहे हैं, हमें उनसे भी सावधान रहने की जरूरत है।
उप राष्ट्रपति ने आह्वान किया कि भारतीय चार्टर्ड एकाउंटेंट और उनकी फर्म अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान विकसित करें और वहां पर खुद को स्थापित करें। इसके लिए उन्होंने सम्मेलन में आए लोगों को शुभकामना दी।
बिहार के किशनगंज से लगी भारत-बांग्लादेश सीमा से महज कुछ दूरी पर प्रतिबंधित क्षेत्र में बांग्लादेश द्वारा अवैध निर्माण कराए जाने का मामला सामने आया है। प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध निर्माण देख सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने बांग्लादेश सुरक्षा गार्ड से वार्ता कर आपत्ति जताई और निर्माण कार्य बंद कराया।
किशनगंज बीएसएफ हेडक्वार्टर अंतर्गत भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के सिमल डांगी बीओपी पर तैनात बीएसएफ की 63वीं बटालियन के जवानों ने ठाकुरगांव में सीमा के 150 गज के अंदर प्रतिबंधित क्षेत्र में रविवार की सुबह बांग्लादेश द्वारा निर्माण कार्य कराते देखा था।
बटालियन की गश्ती टीम ने देखा कि बांग्लादेशी नागरिक कुलिक नदी के तटबंध के साथ जीरो लाइन के 150 गज के अंदर किलाबंदी कर रहे हैं। यह इलाका बांग्लादेश के गोविंदपुर अंतर्गत आता है। रात के अंधेरे में चोरी-छिपे निर्माण कार्य किया जा रहा था।
बीएसएफ ने इस पर आपत्ति जताई और इसे तुरंत बंद करवा दिया। इस दौरान बांग्लादेश सुरक्षा गार्ड ने भविष्य में इस तरह का निर्माण नहीं करने का आश्वासन भी दिया। बता दें कि भारत-बांग्लादेश के संयुक्त दिशा-निर्देशों के अनुसार भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा