विकसित भारत के सपने को साकार करने में योगदान दे रहा मॉर्निंग ग्लोरी स्कूल : जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा
अम्बाला, 17 फरवरी (अभी): अम्बाला शहर के न्यू लक्ष्मी नगर स्थित मॉर्निंग ग्लोरी स्कूल में शनिवार को 18वें वार्षिक उत्सव ‘विवित्सा’ की धूम रही। समारोह को लेकर स्टाफ, बच्चों और अभिभावकों का जोश एवं उत्साह देखते ही बनता था। बच्चों की एक प्रस्तुति के दौरान तो अभिभावक इतने भावुक हो गए कि उन्होंने मंच पर चढक़र अपने बच्चों को गले से लगा लिया।
समारोह के मुख्य अतिथि जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा थे, जबकि हारट्रोन स्किल सैंटर के प्रबंध निदेशक नरेश कुमार ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शिरकत की। सर्वप्रथम, मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि के साथ स्कूल की प्रबंध निदेशक मीना कुमारी, निदेशक महेंद्र भटनागर, प्रधानाचार्या मालती अरोड़ा, प्रबंधक काम्या बतरा, सलाहकार समिति सदस्य राकेश गोयल, सतपाल ग्रोवर, डा. मिनी सपरा, सुमन भटनागर, बलराम सैनी, नरेंद्र सिंह भाटिया, आशीष अग्रवाल और दीपक गांधी ने माता सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित किया।
अपने संबोधन में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा ने कहा कि जब हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश को वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के सपने की बात करते हैं तो उस अवधारणा में एक बिन्दु यह भी है कि देश का हर नागरिक एवं संस्थान अपने नियमित कार्यों को भी उत्कृष्टता के साथ करे और उनमें अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे। वार्षिक उत्सव ‘विवित्सा’ के दौरान मॉर्निंग ग्लोरी स्कूल के प्रबंधन, स्टाफ एवं बच्चों ने जिस प्रकार का उदाहरण प्रस्तुत किया है, उससे लगता है कि विकसित भारत के सपने को साकार करने में मॉर्निंग ग्लोरी स्कूल पहले से अपना योगदान दे रहा है। उन्होंने एंकरिंग कर रही छात्राओं भव्या और मानसी की प्रशंसा करते हुए उन्हें विशेष तौर पर सम्मानित किया।
प्रधानाचार्या मालती अरोड़ा ने अतिथियों को सम्मानित करने के बाद विद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत, अभिभावकों तथा स्टाफ सदस्यों के सहयोग के कारण ही उनका स्कूल तरक्की कर रहा है। स्कूल के निदेशक महेंद्र भटनागर ने विद्यार्थियों को संबोधन करते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को अपने जीवन का सही लक्ष्य चुनना चाहिए, ताकि वह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके। सलाहकार समिति की सदस्य डा. मिनी सपना ने अपने खास अंदाज में अभिभावकों को उनके बचपन की याद दिलाते हुए बच्चों की भावनाओं का ख्याल रखकर उन्हें आगे बढऩे में मदद करने के टिप्स दिए।
वार्षिक उत्सव ‘विवित्सा’ के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत गणेश वंदना व हनुमान चालीसा से हुई। इसके बाद बच्चों ने राजस्थानी लोक नृत्य, कव्वाली, महाभारत प्रसंग, मराठी लावणी, पंजाबी भांगड़ा आदि के माध्यम से हमारे देश की संस्कृति को अपने-अपने अंदाज में प्रस्तुत किया। स्कूल के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने परिवार की महत्वता व मोबाइल से होने वाले दूर प्रभाव को समझाते हुए नृत्य प्रस्तुति दी। अभिभावकों ने न केवल इस समारोह के दौरान अपने बच्चों की प्रस्तुतियों का लुत्फ उठाया, बल्कि प्रश्नोत्तरी में भाग लेकर इसका अभिन्न अंग भी बने। समारोह का अंत राष्ट्रीय गान के साथ हुआ।