अम्बाला नगर निगम मेयर उपचुनाव की जारी प्रक्रिया बावजूद इसकी वैधता पर कानूनी सवाल कायम : एडवोकेट हेमंत कुमार

आरएस अनेजा, 16 फरवरी अम्बाला

अम्बाला नगर निगम के गत चार माह से रिक्त मेयर पद के उपचुनाव हेतु महिला उम्मीदवारों द्वारा नामांकन दाखिल करने  की प्रक्रिया जारी है जो  सोमवार 17 फरवरी तक  चलेगी। नामांकन की जांच 18 फरवरी को जबकि 19 फरवरी तक नामांकन कर चुकी इच्छुक  महिला प्रत्याशियों  द्वारा अपनी उम्मीदवारी वापिस ली जा सकती है एवं उसी दिन 19 फरवरी को चुनाव लड़ने वाली सभी महिला  उम्मीदवारों को चुनाव-चिन्ह आबंटन एवं सभी महिला प्रत्याशियों की फाइनल सूची और मतदान केन्द्रों की लिस्ट  जारी  कर दी जाएगी। मतदान 2 मार्च 2025 जबकि मतगणना 12 मार्च 2025 को होगी।

भाजपा ने जहां शैलजा सचदेवा, जो अम्बाला नगर निगम के वर्तमान मनोनीत सदस्य संदीप सचदेवा की धर्मपत्नी है,  को मेयर पद के लिए पार्टी उम्मीदवार बनाया है, वहीं कांग्रेस ने अमीषा चावला, जो चार वर्ष पूर्व दिसम्बर 2020 में अम्बाला न.नि. मेयर के  चुनाव में साढ़े 16 हजार वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहीं थी,  को पार्टी प्रत्याशी घोषित किया है। इन दोनों में ही सीधा चुनावी मुकाबला होने की प्रबल सम्भावना है।

याद रहे की प्रत्यक्ष (सीधे) तौर पर अम्बाला नगर निगम के मेयर पद के निर्वाचन के  लिए न केवल सामान्य वर्ग की योग्य महिला बल्कि आरक्षित वर्ग  जैसे अनुसूचित जाति (एस.सी.) और पिछड़ा वर्ग (बीसी- ए अथवा बी) की योग्य महिला भी  मेयर पद का उपचुनाव लड़ सकती है। हालांकि मेयर पद की उम्मीदवारी के  लिए न केवल सामान्य वर्ग की महिला बल्कि एस.सी.  और बी.सी वर्ग की महिला को भी कम से कम आठवीं पास होना कानूनन आवश्यक है। 

वहीं, पंजाब एवं हरियाणा  हाईकोर्ट  एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून  के जानकार हेमंत कुमार  ने जिन्होंने गत 5 फरवरी को  अम्बाला  नगर निगम के मेयर पद के उपचुनाव कराने  के विरूद्ध हरियाणा निर्वाचन आयोग को  लीगल (कानूनी) नोटिस भेजा था  चूँकि हरियाणा नगर निगम कानून,1994 की मौजूदा  धारा 13 (1), जो नगर निगम मेयर और नगर निगम सदस्यों (जिन्हें आम तौर पर  पार्षद कहते हैं हालांकि पार्षद शब्द हरियाणा नगर निगम कानून में नहीं है ) की रिक्त हुई सीटों को उपचुनाव द्वारा भरे  जाने  से संबंधित है, में   चार वर्ष पूर्व दिसम्बर-2020 में प्रदेश विधानसभा द्वारा संशोधन कर ऐसा  उल्लेख कर दिया गया था कि उक्त धारा  के प्रावधान रिक्त हुए  मेयर की पद  पर लागू नहीं होंगे अर्थात इसका अर्थ यह है अगर प्रदेश में नगर निगम के मेयर का पद, बेशक वह  किसी भी कारण से रिक्त हुआ हो, तो उसे उपचुनाव द्वारा भरा नहीं जा सकता है।  हालांकि आज तक हरियाणा निर्वाचन आयोग द्वारा उक्त लीगल  नोटिस पर मौन है एवं दस दिन बीते जाने के बाद  भी इसका कोई जवाब नहीं दिया गया है। इस विषय पर हेमंत का कहना है कि उपरोक्त गंभीर  कानूनी पेच के कारण न केवल मेयर उपचुनाव की मौजूदा प्रक्रिया दौरान बल्कि चुनाव सम्पन्न होने एवं नए मेयर के निर्वाचित होने बावजूद कोई भी व्यक्ति हाई कोर्ट में मेयर के उपचुनाव को हरियाणा नगर निगम कानून,1994 की मौजूदा  धारा 13 (1) की स्पष्ट अवहेलना का हवाला देकर चुनौती  दे सकता है.

 इसी बीच उन्होंने  मेयर पद के  उपचुनाव की टाइमिंग (समय)  पर भी कानूनी सवाल उठाया है. हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की धारा 9 (5) में स्पष्ट उल्लेख है कि अगर नगर निगम के रिक्त हुए पद को, जिसका शेष  कार्यकाल कम से कम 6 महीने या उससे अधिक हो,  को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव मार्फ़त  भरा जाना है, तो ऐसा उस पद के  रिक्त होने के अधिकतम 2 महीने के भीतर ही किया जा सकता है. गत वर्ष 8 अक्टूबर 2024 को अम्बाला नगर निगम की तत्कालीन मेयर शक्ति रानी शर्मा के पंचकूला जिले के कालका विधानसभा हलके से भाजपा के टिकट पर विधायक बनने के कारण  अम्बाला नगर निगम का मेयर पद उसी दिन से ही रिक्त हो गया था क्योंकि एक ही समय  पर कोई व्यक्ति  मेयर या न.नि. सदस्य एवं साथ साथ  विधायक या सांसद नहीं रह सकता है,  2 दिसंबर 2024 को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा गजट नोटिफिकेशन जारी कर शक्ति रानी शर्मा का नाम 8 अक्टूबर 2024 की पिछली तारीख से  ही अम्बाला नगर निगम मेयर  के पद से  डी-नोटिफाई कर दिया गया था, इस कारण अम्बाला  मेयर  पद की सीट रिक्त  होने से दो महीने के भीतर अर्थात 8 दिसम्बर 2024 तक उपचुनाव  हो जाना चाहिए था।   

हेमंत का कहना है कि अम्बाला मेयर के  उपचुनाव के लिए 2 मार्च को मतदान होगा जिसके दस दिनों बाद 12 मार्च को मतगणना होगी एवं नई महिला मेयर निर्वाचित होगी. हालांकि उस नव-निर्वाचित मेयर का कार्यकाल केवल दस महीने ही होगा क्योंकि मौजूदा अम्बाला नगर निगम का कार्यकाल अगले वर्ष 13 जनवरी 2026 को पूरा हो रहा है एवं उसी के साथ नव-निर्वाचित अम्बाला की महिला मेयर का भी कार्यकाल समाप्त हो जाएगा. ज्ञात रहे कि मेयर पद का चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार द्वारा  अधिकतम 30 लाख रुपये खर्च किया जा सकता है हालांकि वास्तविक खर्चा इससे कहीं अधिक होता है।  

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