मज़ार्ग्यूज़ युद्ध समाधि स्थल पर गए प्रधानमंत्री श्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति

आरएस अनेजा, 12 फरवरी नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों आज सुबह मार्सिले में मज़ार्ग्यूज़ युद्ध समाधि स्थल पर गये और प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। दोनों नेताओं ने शहीदों के बलिदान को सम्मान देने के लिए वहां पुष्पांजलि अर्पित की।

मज़ार्ग्यूज़ युद्ध समाधि स्थल यूरोप में शांति के लिए लड़ने वाले भारतीय सैनिकों की वीरता और बलिदान का इतिहास संजोए हुए है। उनकी वीरगाथा आज भी लोगों को प्रेरित करती है। यह समाधि स्थल दोनों देशों के लोगों के बीच उन गहरे संबंधों का स्मरण कराता है जो भारत और फ्रांस संबंधों को विकसित करते रहे हैं।

भारत के नए महावाणिज्य दूतावास का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांसीसी गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम श्री इमैनुएल मैक्रों ने मार्सिले में आज संयुक्त रूप से भारत के नए महावाणिज्य दूतावास का उद्घाटन किया।

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति मैक्रों की ओर से महावाणिज्य दूतावास का उद्घाटन भारत और फ्रांस के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक मील का पत्थर है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्रपति मैक्रों की विशिष्ट उपस्थिति की अत्यंत सराहना की। वाणिज्य दूतावास में इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने के लिए एकत्र हुए प्रवासी भारतीयों ने दोनों नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया।

जुलाई 2023 में प्रधानमंत्री की फ्रांस यात्रा के दौरान मार्सिले में महावाणिज्य दूतावास खोलने के निर्णय की घोषणा की गई थी। इस महावाणिज्य दूतावास के पास फ्रांस के दक्षिणी भाग में प्रोवेंस आल्प्स कोटे डी'ज़ूर, कोर्सिका, ओसीटानी और ऑवर्गे-रोन-आल्प्स सहित चार फ्रांसीसी प्रशासनिक क्षेत्रों का वाणिज्य दूतावास क्षेत्राधिकार होगा।

फ्रांस का यह क्षेत्र व्यापार, उद्योग, ऊर्जा और ऐशो-आराम के लिए पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है और भारत के साथ इसके महत्वपूर्ण आर्थिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच आपसी संबंध हैं। फ्रांस के दूसरे सबसे अधिक जनसंख्या वाले शहर में खुला यह नया महावाणिज्य दूतावास भारत-फ्रांस की बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।

अंतर्राष्ट्रीय थर्मोन्यूक्लियर प्रायोगिक रिएक्टर संयंत्र (आईटीईआर) का दौरा किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आज संयुक्त रूप से कैडारैचे में अंतर्राष्ट्रीय थर्मोन्यूक्लियर प्रायोगिक रिएक्टर संयंत्र (आईटीईआर) का दौरा किया। आईटीईआर के महानिदेशक ने दोनों नेताओं का संयंत्र में स्वागत किया। यह किसी भी राष्ट्राध्यक्ष या सरकार के प्रमुख द्वारा आईटीईआर का पहला दौरा है, जो आज दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी संलयन ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है। इस दौरान दोनों नेताओं ने आईटीईआर की प्रगति की सराहना की, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े टोकामाक की असेंबली भी शामिल है, जहां प्लाज्मा को बनाकर, नियंत्रित करके और अंततः जलाकर 500 मेगावाट संलयन ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा। दोनों नेताओं ने परियोजना पर काम कर रहे आईटीईआर इंजीनियरों और वैज्ञानिकों के समर्पण की भी सराहना की।

भारत पिछले दो दशकों से इस परियोजना में योगदान देने वाले सात आईटीईआर सदस्यों में से एक है। लगभग 200 भारतीय वैज्ञानिक और सहयोगी, एलएंडटी, आईनॉक्स इंडिया, टीसीएस, टीसीई, एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी उल्लेखनीय उद्योग कंपनियां आईटीईआर परियोजना में लगी हुई हैं।

Previous
Previous

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द

Next
Next

गुरु रविदास का समानता और करुणा का संदेश देशवासियों को युगों-युगों तक प्रेरित करता रहेगा: विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार