संत रविदास जी की जयंती आज, धूमधाम से मनाई जाएगी
आरएस अनेजा, 12 फरवरी नई दिल्ली
हर साल माघ माह की पूर्णिमा को संत रविदास जी की जयंती मनाई जाती है। भारत में गुरु रविदास जी की जयंती को धूमधाम के साथ मनाया जाता है। संत रविदास जी का जन्म माघ माह की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। इसलिए आज इस तिथी पर गुरु रविदास जी की जयंती मनाई जाती है।
इस साल माघ पूर्णिमा बुधवार, 12 फरवरी को है और इस दिन गुरु रविदास जी की जयंती मनाई जाएगी। संत रविदास की गिनती भारत के महान साधु संतों में की जाती है। रविदास जी ने अपना पूरा जीवन समाज से जाति -वादी भेदभाव को खत्म करने और समाज के सुधार व समाज कल्याण में समर्पित कर दिया। रविदास जी को रैदास, रोहिदास और रूहिदास के नाम से भी जाना जाता है।
प्राचीन समय में गुरु रविदास एक महान संत और समाज सुधारक थे। हर साल माघ पूर्णिमा के दिन गुरु रविदास जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष रविदास जयंती 12 फरवरी के दिन मनाई जाएगी। गुरु रविदास जी ने समाज में उत्पन्न मतभेद और समाज की उन्नति के लिए अपना अहम योगदान दिया। आज के समय में भी गुरु रविदास जी के योगदान और अनमोल विचारों को याद किया जाता है। उनके द्वारा दी गई को शिक्षाओं को लोग अपने जीवन में अपनाते हैं। उनकी शिक्षाओं ने प्रभु की उपासना और धार्मिक एकता में वृद्धि के लिए प्रेरित किया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गुरु रविदास जी हिंदू और सिख धर्म के प्रति अपना श्रद्धा भाव रखते थे।
माना जाता है कि रविदास जी का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी माघ पूर्णिमा को वर्ष 1377 में हुआ था। इसी वजह से माघ पूर्णिमा की शुभ तिथि पर रविदास जयंती का पर्व मनाया जाता है। उनके पिता जूते बनाने का काम किया करते थे। गुरु रविदास जी ने अपने जीवन के दौरान शिक्षा और ज्ञान पर अधिक जोर दिया है। गुरु रविदास का शिक्षा के अलावा समाज सुधार में भी खास योगदान देखने को मिलता है। गुरु रविदास जी ने समाज में उत्पन्न हो रहे मतभेद को खत्म और सामाजिक असमानता को दूर करने के लिए आवाज उठाई और इस विषय के बारे में लोगों को जागरूक किया था।
एक बार संत रविदास के पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया था, जिसके बाद वह एक कुटिया में रहकर साधु-संतों की सेवा करते थे और जूते-चप्पल बनाते थे। वह भक्ति आंदोलन में भी शामिल हुए। समय बीतने के साथ ही लोग उनके विचारों से प्रभावित होने लगे और उनके अनुयायियों की संख्या में वृद्धि होने लगी। इसी के साथ गुरु रविदास शिरोमणि के रूप में प्रसिद्ध हुए।
भगवान उस इंसान के ह्रदय में वास करते हैं जहां किसी भी तरह का बैर भाव नहीं होता है। इसके अलावा न ही किसी तरह का लालच या द्वेष नहीं होता है।
कोई जातक जन्म से छोटा या बड़ा नहीं होता है, लेकिन वो अपने कर्मों से बड़ा-छोटा होता है।