सूरजकुंड मेले में सरकार की वोकल फॉर लोकल योजना चढ़ रही सफलता की सीढ़ियां

सूरजकुंड मेले में सरकार की वोकल फॉर लोकल योजना चढ़ रही सफलता की सीढ़ियां

चण्डीगढ, (KK)- सूरजकुंड में चल रहे 37 वें अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में केन्द्र व प्रदेश सरकार की वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने की मुहिम सिरे चढ़ती नजर आ रही है। मेला ग्राउंड में इस बार मिट्टी के बर्तनों की स्टालों की संख्या में अच्छी खासी बढोतरी देखने को मिल रही है। मेले में आने वाले अधिकतर लोग मिट्टी के बर्तन जरूर खरीदकर ले जा रहे हैं।

सूरजकुंड में 2 फरवरी से शुरू हुए 37वें अंतरराष्ट्रीय  शिल्प मेले में इस बार दर्शकों को मिट्टड्ढी से तैयार बर्तन बहुत आकर्षित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कामगारों के रोजगार को बढावा देने के लिए वोकल फॉर लॉकल योजना शुरू की थी, जिसके बाद हाथ का काम करने वाले कारीगरों के रोजगार में बढ़ोतरी हुई हैं। सरकार की यह मुहिम इस बार के सूरजकुंड मेले में सफलता की सीढ़ियां चढ़ती नजर आ रही है। फरीदाबाद व आस-पास के राज्यों से अनेक कारीगर इस बार सूरजकुंड मेले में मिट्टी से तैयार बर्तनों की स्टाल लगाए हुए हैं।

शिल्प मेला में मिट्टी  से तैयार यह बर्तन दर्शकों को भी लुभा रहे हैं। फरीदाबाद से आए गंगाराम और पुष्पा देवी सहित मेला ग्राउंड में अनेकों कारीगरों ने हाथों से तैयार मिट्टी के बर्तनों की स्टॉल लगाई हुई हैं। इन स्टालों पर 20 रुपए से लेकर 1250 रुपए की कीमत के मिट्टी के बर्तन खरीदे जा सकते हैं। मिट्टी से तैयार इन बर्तनों में कप, गिलास, बोतल, कुकर, कढ़ाई, तवा, केतली, लोटा, गुलक, जग, ट्रे सहित बच्चों के खिलौने भी शामिल हैं।


राष्ट्रीय शिल्पकार अवॉडी महावीर सिंह सैनी पीतल पर नक्काशी कला को दे रहे हैं बढ़ावा

हाई स्कूल की शिक्षा के दौरान अपनाई पीतल पर नक्काशी की कला


37 वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला में देश-विदेश के शिल्पकार अपनी सर्वश्रेष्ठ कृतियों की ओर पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। मुरादाबाद के राष्ट्रीय शिल्पकार पुरस्कार से सम्मानित महावीर सिंह सैनी पीतल पर नक्काशी की कला को प्रसिद्धि दिलाने में निरंतर प्रयासरत हैं। उन्हें वर्ष 2017 के लिए राष्ट्रीय शिल्पकार अवॉर्ड मिला है। वर्तमान में पीतल धातु महंगी होने की वजह से आज कल उन्होंने कांसे पर नक्काशी करना शुरू किया है।

महावीर सिंह सैनी मेला परिसर में स्टॉल संख्या-1240 पर पीतल पर नक्काशी की कृतियों को प्रदर्शित कर रहे हैं। उन्होंने हाई स्कूल में पढाई के दौरान ही 1988 में पडोस में पीतल पर नक्काशी की कला को अपनाने की प्रेरणा ली। माता-पिता ने भी उन्हें इस कला को अपनाकर आत्मनिर्भर होने के लिए प्रोत्साहित किया। आज वे 15 सदस्यों के साथ पूजा हैंडीक्राफ्ट्स समूह के माध्यम से पीतल पर नक्काशी की कला को आगे बढा रहे हैं। इस स्टॉल पर 100 रुपए से 45 हजार रुपए तक की पीतल पर नक्काशी की कृतियां उपलब्ध हैं। उन्होंने 55 हजार रुपए की पीतल पर नक्काशी की जिराफ सैट की कृति को मेले के दौरान पर्यटकों को बिक्री किया है।

शिल्पकार महावीर सिंह सैनी का कहना है कि पीतल पर नक्काशी का कार्य इतना आसान नहीं है। धातु को गलाने, मॉल्डिंग और बफिंग की प्रक्रिया के दौरान हानिकारक धुंआ व डस्ट उडती है, जिससे कैंसर बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। इसके दृष्टिगत वर्तमान में धातु गलाने व बफिंग के कार्य में मशीन का प्रयोग भी शुरू हुआ है।

शिल्प मेला के पार्टनर देश तंजानिया पवेलियन के उत्पाद से रिझ रहे पर्यटक


देश के कलाकार भी संस्कृति से करवा रहे रूबरू

महिलाओं के आभूषण वस्त्र व सी-वीड पाउडर किए गए प्रदर्शित


37 वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला के पार्टनर देश संयुक्त गणराज्य तंजानिया द्वारा मेला परिसर में मुख्य चौपाल के पीछे तंजानिया पवेलियन में देश के शिल्पकारों व बुनकरों के उत्पाद पर्यटकों को रिझा रहे हैं।

संयुक्त गणराज्य तंजानिया इस वर्ष शिल्प मेला में पार्टनर देश के रूप में भागीदारी कर रहा है। इस देश के कलाकार भी मुख्य व छोटी चौपाल पर अपने देश की समृद्ध संस्कृति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ रहे हैं। तंजानिया के स्टॉल पर राष्ट्रीय ध्वज के अलावा महिलाओं के आभूषण, वस्त्र तथा समुद्र से बनाए गए सी-वीड पाउडर विशेष रूप से प्रदर्शित की गई है।

तंजानिया की स्टॉल पर महिलाओं के आभूषण में माला, पर्स, चूडियां, टोकरी इत्यादि उपलब्ध हैं। तंजानिया की टीम में 30 से अधिक प्रतिनिधि हैं, जिनमें कलाकार, संगीतज्ञ व स्टॉल के प्रभारी शामिल हैं। इस स्टॉल में अफ्रीका के सबसे ऊंचे पर्वत किलामंजरो की तस्वीर भी प्रदर्शित की गई है, जिसकी समुद्री तल से ऊंचाई 5895 मीटर है। यह पर्वत अफ्रीका का सबसे ऊंचा पर्वत है। इसके अलावा वन्य प्राणी अभ्यारण्य की तस्वीर भी प्रदर्शित की गई है, जिसमें शेर, हाथी, भैंस, बाघ तथा गेंडा जैसे पशु पाए जाते हैं।


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