26/08/25

श्रीअन्न' के मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए लाभ पर कार्यशाला आयोजित

एन.एस.बाछल, 26 अगस्त, जयपुर।

राज्य कृषि प्रबंध संस्थान, दुर्गापुरा, जयपुर में सोमवार को 'श्रीअन्न' के मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण हेतु लाभ विषय पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पद्मश्री एवं कृषि रत्न अवार्ड से सम्मानित मिलेट मेन ऑफ भारत डॉ. खादर वाली ने कहा कि श्रीअन्न जो आमतौर पर मिलेट्स के नाम से जाने जाते हैं। इनमें पोषक तत्व अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में पाए जाते हैं इसलिए श्रीअन्न को सुपरफूड भी कहा जाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा श्रीअन्न को प्रोत्साहित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रयास किए गए, जिसके फलस्वरुप उनके प्रयासों से वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाया गया।

 उन्होंने कहा कि भारत में श्रीअन्न को मोटे तौर पर दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, बड़े श्रीअन्न और छोटे श्रीअन्न। मोटे अनाज में बाजरा, रागी, चेना, ज्वार, मक्का शामिल हैं तथा छोटे अनाज में मुराट, कुटकी, कोंदो, सांवा, कांगणी शामिल हैं। श्रीअन्न का विश्व में सबसे अधिक उत्पादन हमारे देश में होता है।

डॉ. खादर वाली ने कहा कि मिलेट्स केवल भोजन नहीं, बल्कि मानव शरीर के लिए औषधि और पृथ्वी के लिए वरदान है। इन्हें अपनी थाली में वापस लाना ही अच्छे स्वास्थ्य और टिकाऊ भविष्य की जरूरत है। वर्तमान में मिलेट्स की लगभग 250 किस्में उपलब्ध हैं। मिलेट्स में पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाये जाते हैं जो ब्लड शुगर को संतुलित करने में मदद करते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अधिकतर बीमारियां ब्लड शुगर के असंतुलन के कारण होती हैं। मिलेट्स के सेवन से इस असंतुलन को नियंत्रित करने का प्रभावी तरीका है। मिलेट्स को भोजन में शामिल करके हमारे स्वास्थ्य में क्रांतीकारी बदलावा लाया जा सकता है। जब भोजन सही होता है तब दवाइयों की जरूरत नहीं पड़ती।

डॉ. खादर ने कहा कि मिलट्स को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनायें। हर तरह से मिलेट्स को किसी भी मौसम में ले सकते हैं बशर्ते खाने में इस्तेमाल से पहले 8 घंटे भिगोकर रखें। ज्यादा से ज्यादा 10 घंटे भिगोकर रखें। तब जाकर मिलेट्स के आपके शरीर को पूरे फायदे मिलेंगे, पचने में आसानी होगी। 

शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी ने बताया कि श्रीअन्न का उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने हेतु विभाग कृषकों एवं वैज्ञानिकों के साथ मिलकर नवीनतम तकनीकी के माध्यम से उच्च आयाम स्थापित कर रहा है। श्रीअन्न के प्रसंस्करण हेतु सरकार के स्तर से विभिन्न प्रकार की सहायता राशि कृषकों को उपलब्ध करवाई जा रही है। इस क्षेत्र में विभिन्न एफपीओ एवं स्वयं सहायता समूह अच्छा कार्य कर रहे हैं।

राज्य में श्रीअन्न (यथा बाजरा और ज्वार और अन्य छोटे मिलेट्स) की खेती को प्रोत्साहित करने, उत्पादन, घरेलू उपभोग में वृद्धि और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए कृषकों को बीज मिनीकिट, माइक्रो न्यूट्रिएंट एवं बायो पेस्टिसाइड किट का वितरण, फसल प्रदर्शन आयोजन, प्रमाणित बीज वितरण एवं बीज उत्पादन किया जा रहा है। मिलेट्स के संवर्द्धन, प्रोत्साहन व नवीनतम तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने की दृष्टि से जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान केन्द्र मंडोर पर मिलेट्स उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना की गई है और आईआईएमआर हैदराबाद से मिलेट्स का जर्म प्लाज्मा मंगवाकर राजस्थान के लिए उपयुक्त किस्म विकसित करने का कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा बाडमेर के गुढ़ामालानी में भारतीय मिलेट्स अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय केन्द्र के लिए राज्य सरकार द्वारा भूमि आवंटन उपरांत कार्य प्रगति पर है। भारत सरकार का मिलेट्स विकास निदेशालय भी राज्य के जयपुर शहर में स्थित है।  

उन्होंने बताया कि राज्य में श्रीअन्न का उत्पादन एवं जागरूकता बढाने हेतु श्री अन्न प्रमोशन एजेंसी की स्थापना की गई है। राज्य सरकार ने इस वर्ष की बजट घोषणा में श्रीअन्न को मिड डे मिल में शामिल की घोषणा की है। इसके साथ ही मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए सहकारिता विभाग के उपभोक्ता भंडारों में मिलेट्स के लिए एक अलग से कॉर्नर उपलब्ध करवाया जा रहा हैं।

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