सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण, नागरिक कर्तव्य और स्व जागरण के लिए कार्य हो
एन.एस.बाछल, 12 अगस्त, जयपुर।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने सोमवार को पाथेय भवन में 'राष्ट्रोत्थान' ग्रंथ का विमोचन किया। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष पर समाज परिवर्तन के लिए प्रस्तुत पंच सूत्रों की चर्चा करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण, नागरिक कर्तव्य और स्व जागरण से ही राष्ट्रोत्थान संभव है। उन्होंने कहा कि मां भारती का परम वैभव ही हम सभी का ध्येय होना चाहिए। उन्होंने देश के सर्वांगीण विकास और वैभव के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।
हरिभाऊ बागडे ने पाथेय भवन में हिन्दुस्तान प्रकाशन संस्था और पाथेय कण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में 'राष्ट्रोत्थान' ग्रंथ के प्रकाशन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृति हमारे जीवन जीने का ढंग है। निरंतर होने वाले परिवर्तनों को स्वीकार करते हुए जीवन में आगे बढ़ना ही संस्कृति है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद को केन्द्र में रखकर कार्य करने की भी आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि 'व्यष्टि नहीं समष्टि' के अंतर्गत सभी सामाजिक समरसता और भेदभाव से ऊपर उठकर कार्य करें। उन्होंने आजादी आंदोलन से लेकर विभिन्न अवसरों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महत्वपूर्ण अवदान की चर्चा करते हुए संघ की 'राष्ट्र प्रथम' की सोच से सबको जुड़ने पर जोर दिया।
इससे पहले राजस्थान के क्षेत्र संघ चालक डॉ. रमेश चन्द्र अग्रवाल ने संघ के शताब्दी वर्ष पर प्रकाशित 'राष्ट्रोत्थान' ग्रन्थ और पंच संकल्प सूत्रों की विस्तार से विवेचना की। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर देश भर में किए जाने वाले आयोजनों और आम जन को राष्ट्रीयता से जोड़े जाने का आह्वान किया। हिन्दुस्तान समाचार के रमेश पतंगे और हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नंद किशोर पाण्डेय ने भी विचार रखे।
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