भाकृअनुप-भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान संस्थान में महिलाओं को साइबर व डिजिटल सुरक्षा के प्रति किया जागरूक
करनाल, 06 अगस्त (अन्नू): जिला पुलिस करनाल द्वारा साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को रोकने और आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भाकृअनुप-भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIWBR), करनाल में "महिलाओं के लिए साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल सुरक्षा जागरूकता" विषय पर एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया।
इस सत्र में साइबर थाना करनाल की टीम ने संस्थान की महिला वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कर्मचारियों को साइबर ठगी से बचाव के व्यावहारिक तरीके और डिजिटल सुरक्षा के मूल मंत्र बताए।
संस्थान के निदेशक व साइबर पुलिस की उपस्थिति
कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया:
संस्थान की ओर से: आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूबीआर के निदेशक डॉ. रतन तिवारी और प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सोनिया श्योराण सहित कई वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
पुलिस टीम: करनाल जिला पुलिस की ओर से डीएसपी राखी विश्वकर्मा के कुशल मार्गदर्शन में साइबर थाना से उप-निरीक्षक (SI) चांद राम, सहायक उप-निरीक्षक (ASI) देवेंद्र और सिपाही लवकेश कुमार ने मुख्य वक्ता के रूप में प्रतिभागियों को संबोधित किया।
साइबर ठगी से बचाव के मुख्य बिंदु और हेल्पलाइन 1930
साइबर थाना की टीम ने डिजिटल युग में सतर्क रहने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं:
गोपनीयता बनाए रखें: ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन, फिशिंग लिंक्स, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, ओटीपी (OTP) और बैंक डिटेल्स किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
गोल्डन ऑवर (Golden Hour) का महत्व: साइबर पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यदि किसी के साथ वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है, तो शुरुआती 1 घंटे (गोल्डन ऑवर) में तुरंत कदम उठाना बेहद जरूरी है।
राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन: वित्तीय ठगी होते ही तुरंत 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते खातों को होल्ड कराकर आर्थिक नुकसान रोका जा सके।
'अभेद्य ऐप' (Abhedya App) डाउनलोड करने का आह्वान
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने विशेष रूप से महिलाओं व आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए विकसित 'अभेद्य ऐप' की जानकारी दी।
अधिकारियों ने आपातकालीन स्थिति में ऐप के उपयोग, एसओएस (SOS) बटन और सुरक्षा फीचर्स के बारे में विस्तार से समझाया।
सभी महिला प्रतिभागियों और स्टाफ से अपील की गई कि वे अपने मोबाइल में इस ऐप को अनिवार्य रूप से डाउनलोड करें और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें।
सत्र के अंत में प्रतिभागियों ने साइबर अपराधों से जुड़े अपने सवाल पूछे, जिनका साइबर विशेषज्ञों ने सरलता से उत्तर दिया। संस्थान के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने करनाल पुलिस की इस पहल की सराहना की और पूरी टीम का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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