हरियाणा में मौसम का बदला मिजाज: बारिश से झुलसती गर्मी और लू से मिली बड़ी राहत, आज रात से फिर सक्रिय होगा नया पश्चिमी विक्षोभ

हरियाणा/मौसम, 2 जून (अन्‍नू): हरियाणा में पिछले कुछ दिनों से हुई प्री-मानसून की बारिश की वजह से आमजन को भीषण गर्मी और जानलेवा लू से बड़ी राहत मिली है। बीते 27 मई तक जहां प्रदेश का अधिकतम तापमान रिकॉर्ड तोड़ 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, वहीं बारिश के बाद इसमें भारी गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर करीब 39 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह गया है। हालांकि, सोमवार को प्रदेश के अधिकतम तापमान में रविवार के मुकाबले 1.6 डिग्री सेल्सियस की मामूली बढ़ोतरी जरूर दर्ज की गई, इसके बावजूद अभी भी दिन का पारा सामान्य से 4.4 डिग्री सेल्सियस कम बना हुआ है। इसी तरह न्यूनतम तापमान में भी 1.8 डिग्री सेल्सियस का उछाल आया है, लेकिन यह भी सामान्य से 3 डिग्री कम रिकॉर्ड किया जा रहा है।

बैक-टू-बैक दो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस होंगे एक्टिव, 2 से 6 जून तक मौसम रहेगा परिवर्तनशील

हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ ने ताजा अपडेट जारी करते हुए बताया कि प्रदेश में अभी दो और बैक-टू-बैक पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) सक्रिय होने जा रहे हैं। इसके चलते 2 जून से 6 जून तक राज्य में मौसम पूरी तरह परिवर्तनशील और उतार-चढ़ाव वाला रहेगा।

डॉ. खीचड़ के अनुसार, पहला पश्चिमी विक्षोभ आज (2 जून) की रात से ही सक्रिय हो जाएगा, जबकि दूसरा सिस्टम 4 जून को पहाड़ी क्षेत्रों की ओर आगे बढ़ेगा। इन दोनों मौसमी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से मंगलवार रात से लेकर 6 जून के दौरान हरियाणा के अधिकांश इलाकों में तेज धूलभरी हवाएं चलने, गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी होने और कुछ जिलों में मध्यम से भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। हालांकि, इस दौरान दिन के तापमान में कोई बहुत बड़ा उलटफेर देखने को नहीं मिलेगा।

हरियाणा में इस बार प्री-मानसून दमदार, सामान्य से 18% ज्यादा बरसे बादल

मौसम विज्ञान केंद्र, चंडीगढ़ द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 1 मार्च से 31 मई तक की अवधि में प्रदेश के भीतर कुल 52.4 मिमी. बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि इस अवधि में अमूमन औसत बारिश 44.6 मिमी. ही होती है। इस लिहाज से हरियाणा में सामान्य से 18% ज्यादा प्री-मानसून बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब जून की शुरुआत से जो भी बारिश होगी, उसे सीधे तौर पर मानसून सीजन की बारिश के रूप में आंका जाएगा, क्योंकि प्रदेश में जून से लेकर सितंबर तक का समय आधिकारिक तौर पर मानसून का सीजन होता है।

पिछले 23 सालों का इतिहास– 13 बार रूठा मानसून, साल 2014 रहा सबसे सूखा

मौसम विभाग द्वारा पिछले 23 वर्षों (2003 से 2026) के मानसून आंकड़ों का जो विश्लेषण साझा किया गया है, वह खेती और जल प्रबंधन के लिहाज से काफी चिंताजनक है। इस अवधि में कुल 13 साल ऐसे रहे हैं जब मानसून की बेरुखी के कारण सामान्य से बेहद कम बारिश दर्ज की गई।

  • सबसे खराब स्थिति (वर्ष 2014): साल 2014 में मानसून सबसे खराब रहा। उस साल मानसून 1 जुलाई को पहुंचा था और केवल 200.1 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 57 प्रतिशत कम थी।

  • कमजोर मानसून के अन्य साल: इसके अलावा वर्ष 2012 में 40 प्रतिशत और वर्ष 2019 में 42 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई थी।

  • सबसे जल्दी आगमन (वर्ष 2013): मानसून के आगमन की बात करें तो सबसे पहले 16 जून 2013 को मानसून पहुंचा था, लेकिन इसके बावजूद उस साल सामान्य से 23 प्रतिशत कम वर्षा हुई थी।

  • सबसे देरी से आगमन (वर्ष 2004): सबसे देरी से मानसून 8 जुलाई 2004 को आया था, जिसके कारण उस वर्ष सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी।

मौसम के इस बदलते मिजाज और आने वाले विक्षोभ को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर ही अपनी फसलों की सिंचाई और कृषि कार्यों का प्रबंधन करें।

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