दक्षिण पन्ना वनमंडल की वल्चर फ्रेंडली गौशालाओं में गिद्ध संरक्षण की दिशा में अनूठी पहल

एन.एस.बाछल, 16 फरवरी, भोपाल।

दक्षिण पन्ना वनमंडल के अंतर्गत संचालित गौशालाएं अब पूर्णतः "वल्चर फ्रेंडली" (गिद्ध-अनुकूल) स्वरूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रही हैं। पारिस्थितिकी तंत्र के सजग प्रहरी 'गिद्धों' के संरक्षण के प्रति अपनी कटिबद्धता दोहराते हुए इन गौशालाओं ने एक ऐसी आदर्श कार्यप्रणाली विकसित की है, जहाँ मवेशियों के उपचार और प्रबंधन में केवल पर्यावरण-अनुकूल विधियों का ही प्रयोग किया जा रहा है। वन विभाग के समन्वय से संचालित इस पहल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि गौशाला परिसर में निवास करने वाली समस्त गायों और अन्य मवेशियों की देखरेख में गिद्धों के जीवन के लिए संकट पैदा करने वाली किसी भी गतिविधि को स्थान न मिले।

इन "वल्चर फ्रेंडली" गौशालाओं में गिद्धों के लिए घातक मानी जाने वाली दवाओं के उपयोग पर पूर्णतः अंकुश लगा दिया गया है। वर्ष 2008 से प्रतिबंधित डाइक्लोफेनेक (Diclofenac/Dynapar) के साथ-साथ हाल के वर्षों में प्रतिबंधित की गई औषधियाँ जैसे एसीक्लोफेनेक (Aceclofenac), केटोप्रोफेन (Ketoprofen) और निमेसुलाइड (Nimesulide) का उपयोग यहाँ पूरी तरह वर्जित है। वर्तमान में इन केंद्रों पर चिकित्सीय आवश्यकता होने पर केवल गिद्ध-सुरक्षित दवाओं जैसे मेलोक्सिकैम (Meloxicam) और टोलफेनामिक एसिड (Tolfenamic acid) को ही प्राथमिकता दी जा रही है। यह समस्त प्रक्रिया पंजीकृत पशु चिकित्सकों की कड़ी निगरानी में की जा रही है, जिससे मृत मवेशियों के अवशेषों में किसी भी प्रकार की हानिकारक दवाओं का अंश शेष न रहे और गिद्धों को सुरक्षित आहार उपलब्ध हो सके।

संरक्षण की यह पहल केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान का रूप ले रही है। गौशाला प्रबंधन द्वारा नियमित रूप से ग्रामीणों और गौ-सेवकों को गिद्धों के महत्व और सुरक्षित दवाओं के लाभों के प्रति शिक्षित किया जा रहा है। स्व-प्रमाणन (Self-Certification) की इस पारदर्शी व्यवस्था ने गौशाला संचालकों की जिम्मेदारी को और अधिक सुदृढ़ किया है। वन विभाग के संरक्षण प्रयासों में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए ये गौशालाएँ न केवल पशु कल्याण का केंद्र बनी हुई हैं, बल्कि जैव-विविधता के संरक्षण में भी अपनी निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। भविष्य के प्रति अपनी सतत प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए गौशाला प्रबंधन ने घोषणा की है कि गिद्धों के अस्तित्व की रक्षा के लिये वे सदैव विधि-सम्मत और सुरक्षित पद्धतियों का अनुसरण करते रहेंगे।

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