23/07/25

भारत में थमेगा मिग-21 विमान का सफर, अम्बाला में रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडिस भर चुके विमान में उड़ान  

स्पेशल रिपोर्ट, आरएस अनेजा 23 जुलाई

भारतीय वायुसेना की कभी रीढ़ समझे जाने वाले व 62 वर्ष सेवा अवधि के बाद लड़ाकू विमान मिग-21 का सफर आगामी 19 सितंबर 2025 को भारत में थम जाएगा। भारतीय वायुसेना से मिग-21 की अंतिम दो स्क्वाड्रन खत्म होगी जिनका स्थान स्वदेशी निर्मित तेजस एमके-1ए विमान लेंगे। मिग-21 को रिटायर करने के लिए चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर 19 सितंबर को विदाई कार्यक्रम होगा।

 

एक समय ऐसा था जब तीसरी पीढ़ी के मिग-21 विमान भारतीय वायुसेना की रीढ़ थे, मगर देश में विमानों की लगातार दुर्घटनाओं के कारण इन विमानों को एनडीए सरकार के समय “फ्लाइंग कॉफिन यानि उड़ता ताबूत” तक कहा जाने लगा था। उस समय 73 वर्षीय जार्ज फर्नांडिस देश के रक्षा मंत्री थे। विमानों को लेकर उपजे इस मिथ्य को तोड़ने तथा इसे सुरक्षित साबित करने के लिए उन्होंने स्वयं मिग-21 में उड़ान भरने की तैयारी की।

 

अगस्त 2003 में अम्बाला छावनी एयरफोर्स स्टेशन पर मिग-21 विमानों की नंबर-3 कोबरा स्क्वाड्रन को इस कार्य के लिए चुना गया। तत्कालीन रक्षामंत्री जार्ज फर्नांडिस अम्बाला छावनी एयरफोर्स स्टेशन पर पहुंचे जहां उन्होंने एक अगस्त 2003 को मिग-21 विमान में उड़ान भरनी थी। एक अगस्त को प्रात: भारी बारिश हुई, मगर मौसम साफ होते ही उड़ान भरने की तैयारियां शुरू हुई। कोबरा स्क्वाड्रन से विंग कमांडर एन हरीश मिग-21 के पायलट थे। उड़ान भरने से पहले जरूरी प्रोटोकॉल पूरे किए गए इसके बाद टिवन सिटर मिग-21 विमान में विंग कमांडर एन हरीश के साथ रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडिस ने उड़ान भरी। लगभग आधे घंटे की इस उड़ान में उन्होंने जी-फोर्स को महसूस किया।

 

उड़ान के बाद विमान सुरक्षित लैंड हुआ तो रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडिस ने उड़ान के अनुभव को साझा किया। उन्होंने तब कहा था कि “मिग-21 का टेक ऑफ, उड़ान व लैंडिंग सब कुछ एक पाठ्य पुस्तक सामान था”, उन्होंने विमान और इसे उड़ाने वाले पायलट एन हरीश की भी प्रशंसा की थी।

 

मिग-21 लड़ाकू विमान का यह किस्सा तब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। अम्बाला एयरफोर्स स्टेशन में मिग-21 विमान की नंबर तीन कोबरा स्क्वाड्रन कई वर्षों तक तैनात रही। मगर वर्ष 2020 में अम्बाला में राफेल विमान के आगमन से ठीक पहले इस स्क्वाड्रन को राजस्थान के नाल एयरबेस शिफ्ट किया गया।

 

हर मोर्चे पर मिग-21 ने अपनी भूमिका निभाई

 

सन् 1965 व 1971 में भारत-पाक युद्ध, 1999 कारगिल युद्ध, 2019 बालाकोट एयर स्ट्राइक व अन्य मोर्चों पर मिग-21 ने भारतीय वायुसेना के लिए शानदार भूमिका अदा की। तीसरी पीढ़ी के इस विमान के पायलट विंग कमांडर अभिनंदन ने फरवरी 2019 में चौथी पीढ़ी के पाकिस्तान के एफ-16 को मार गिराकर दुनिया में सुर्खियां बटौरी थी और बेहतरीन तकनीक का उदाहरण प्रस्तुत किया था।

 

मिग-21 भारत का पहला सुपरसोनिक विमान था। भारत ने रूस निर्मित 800 से ज्यादा मिग-21 विमान खरीदे थे। इन्हें लगातार अपग्रेड करते हुए वायुसेना अब तक इनका इस्तेमाल कर रही है। मिग-21 बाइसन इसका उन्नत वर्जन है। वायुसेना ने वर्ष 2013 में मिग-21 के सर्विस में 50 साल पूरा होने का जश्न मनाया था।

 

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