हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा करेगी यह सच्ची कहानी - फ़िल्म "120 बहादुर"
आरएस अनेजा, 23 नवम्बर नई दिल्ली - सन् 1962 में दुर्गम चोटियों पर लड़े गए भारत-चीन युद्ध पर आधारित फरहान अख्तर की फिल्म '120 बहादुर' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी हैं जिसे पसंद किया जा रहा है।
फिल्म '120 बहादुर' की कहानी असल में भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी परमवीर चक्र विजेता मेजर शैतान सिंह भाटी के साहस और नेतृत्व पर केंद्रित है, जो 120 भारतीय जवानों के साथ रेज़ांग ला पोस्ट की रक्षा के लिए 3000 चीनी सैनिकों के सामने डटकर खड़े रहे। पोस्ट पर कब्जा करने के लिए चीनी सैनिक हर तरह की रणनीतियाँ अपनाते हैं, लेकिन बेहद कम संसाधनों, कड़ाके की ठंड और लगातार बढ़ते दबाव के बीच भारतीय सेना का अदम्य हौसला पराजित नहीं होता।
फिल्म यह दिखाती है कि किस तरह इन वीर जवानों ने असंभव हालात में भी अपने कर्तव्य और देश के सम्मान को सर्वोपरि रखा। फिल्म में भारतीय सैनिकों के असाधारण साहस को बेहद प्रभावशाली तरीके से पेश किया गया है। कुल मिलाकर ‘120 बहादुर’ फिल्म उन 120 वीरों की अमर गाथा है जिसे हर भारतीय को देखना चाहिए।
फिल्म की कहानी की बात करें तो ये रेडियो मैन रणचंदर यादव (स्पर्श वालिया) की नजर से दिखाई गई है। वो चार्ली कंपनी में शामिल हुआ एक जवान हैं और सैनिकों की बहादुरी और बलिदान की कहानी को दर्शकों तक पहुंचाता है। फिर कहानी 15 नवंबर, 1962 के वक्त में जाती है, जहां रणचंदर अपनी बटालियन से मिलते हैं। अहीर रेजिमेंट के 120 बहादुर सैनिक मेजर शैतान सिंह भाटी (फरहान अख्तर) के नेतृत्व में लड़ते हैं। मेजर भाटी साहसी अधिकारी हैं। वे लीडर के साथ अपने साथियों की भावनाओं को समझने वाले इंसान भी हैं। बता दें कि फिल्म 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान रेजांग ला की लड़ाई पर बनी है, जहां 3000 चीनी सैनिकों ने एक भारतीय चौकी पर हमला कर दिया था। 18000 फीट ऊंचाई, माइनस 20 डिग्री तापमान, संसाधनों की कमी के बावजूद भारतीय जवानों ने हार नहीं मानी और लद्दाख के रेजांग ला दर्रे में चीनी का डटकर मुकाबला किया।
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