19/07/26

संसार रात के सपने जैसा क्षणभंगुर, मोक्ष स्वयं में विश्राम की अवस्था: अंबाला दुखेड़ी सत्संग में बोले महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञान नाथ महाराज

अंबाला, 19 जुलाई (अन्‍नू): निराकारी जागृति मिशन के चेयरमैन और महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने कहा है कि यह पूरा संसार रात के सपने के समान क्षणभंगुर है, जहां कुछ भी स्थायी या स्थिर नहीं है। अंबाला के दुखेड़ी गांव में आयोजित एक विशाल सत्संग कार्यक्रम में उमड़े भारी जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने जीवन, मृत्यु और आत्मा के गूढ़ रहस्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मृत्यु शरीर का अंत है, आत्मा की नई यात्रा की शुरुआत

सत्संग में आध्यात्मिक ज्ञान की गंगा बहाते हुए महामंडलेश्वर ने कहा कि मृत्यु केवल नश्वर शरीर का अंत है, अमर आत्मा का नहीं। वास्तव में यह जीवात्मा की एक नई यात्रा की शुरुआत होती है। उन्होंने पंचतत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का उदाहरण देते हुए संगत को समझाया कि जैसे ही यह मानव शरीर नष्ट होता है, वैसे ही ये पांचों तत्व पुनः इस ब्रह्मांड में विलीन हो जाते हैं। हालांकि, इसके भीतर रहने वाली चेतन आत्मा नष्ट नहीं होती, बल्कि वह अपने संचित कर्मों के आधार पर एक नया आधार (शरीर) ढूंढ लेती है।

भीतर से शांत और विकार-शून्य होना ही मोक्ष

स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने मोक्ष की परिभाषा को बेहद सरल शब्दों में स्पष्ट करते हुए कहा कि मोक्ष कोई ऐसी भौतिक मंजिल नहीं है, जिसे दुनिया में कहीं दूर जाकर या ढूंढकर प्राप्त किया जाए। हकीकत में मोक्ष स्वयं में विश्राम करने की एक परम अवस्था है। जब मनुष्य सांसारिक अपेक्षाओं, उपेक्षाओं और एक-दूसरे से तुलना करने वाले बंधनों से पूरी तरह मुक्त हो जाता है, और भीतर से बिल्कुल शांत व विकार-शून्य (बुराइयों से दूर) हो जाता है, तभी उसे अद्वैत का सच्चा बोध होता है।

सच्चा ब्रह्मज्ञानी संसार में रहकर भी रहता है निर्लिप्त

उन्होंने सत्संग में आए श्रद्धालुओं को ब्रह्मज्ञान का महत्व समझाते हुए कहा कि सच्चा ब्रह्मज्ञानी वही व्यक्ति है, जो इस संसार के तमाम व्यवहारों और जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी इसमें पूरी तरह लिप्त (मोह-माया में ग्रस्त) नहीं होता। ऐसा उत्तम पुरुष बाहर से देखने में बेहद साधारण दिखाई देता है, लेकिन वह भीतर से असीम आध्यात्मिक आनंद में डूबा रहता है। ऐसा इंसान जीते-जी इस संसार में मुक्ति का असली अधिकारी बन जाता है। इस पावन सत्संग के अवसर पर अंबाला और आसपास के क्षेत्रों से भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और गुरु वचनों का लाभ उठाया।

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