इस्पात भारत की अर्थव्यवस्था का आधार है, कोयला और खनन क्षेत्र वह मजबूत आधार है जिस पर यह खड़ा है: केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी
आरएस अनेजा, 26 अप्रैल नई दिल्ली
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने आज मुंबई में इस्पात क्षेत्र पर आयोजित एक प्रमुख द्विवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी एवं सम्मेलन, इंडिया स्टील के छठे संस्करण को संबोधित किया।
इस्पात पर अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी एवं सम्मेलन ने नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रमुखों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और नागरिक समाज के बीच इस्पात क्षेत्र की उभरती गतिशीलता और कोयला उद्योग के साथ इसके सहजीवी संबंधों पर संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य किया।
अपने मुख्य भाषण में, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री, जी. किशन रेड्डी ने इस बात पर जोर दिया कि इस्पात भारत की आर्थिक प्रगति का आधार है और विकसित भारत 2047 के लिए राष्ट्रीय दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण प्रवर्तक है। उन्होंने बताया कि कैसे भारत बुनियादी ढांचे के विकास में नए वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है। जम्मू और कश्मीर में विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे पुल चिनाब ब्रिज से लेकर तमिलनाडु में ऐतिहासिक पम्बन ब्रिज तक - यह सब इस्पात क्षेत्र की बढ़ती ताकत के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि देश की बुनियादी ढांचे की यात्रा में हर मील का पत्थर इस्पात से बना है। यह एक गतिशील राष्ट्र की प्रगति और आकांक्षाओं को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि भारत के इस्पात क्षेत्र में हाल ही के वर्षों में प्रभावशाली वृद्धि हुई है जिससे देश विश्व स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक राष्ट्र बन गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के शब्दों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने इस्पात को भारत का "उदयमान क्षेत्र" बताया, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान के माध्यम से घरेलू खपत, औद्योगिक विस्तार और आत्मनिर्भरता का प्रमुख कारक है।
रेड्डी ने इस बात पर जोर दिया कि यदि इस्पात भारत की अर्थव्यवस्था का आधार है तो कोयला और खनन क्षेत्र इसकी मजबूत नींव है। उन्होंने कच्चे माल की सुरक्षा विशेषकर कच्चे माल की रणनीति और कच्चे माल के मिश्रण में बदलाव के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लौह अयस्क, कोकिंग कोयला, चूना पत्थर और मैंगनीज, निकल और क्रोमियम जैसे आवश्यक मिश्र धातु तत्वों की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक आर्थिक आवश्यकता और रणनीतिक अनिवार्यता दोनों है।
भारत ने हाल ही में पिछले वित्तीय वर्ष में एक बिलियन टन कोयला उत्पादन और प्रेषण की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है - जो राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। ऊर्जा सांख्यिकी 2025 से पता चलता है कि कोयला भारत की कुल ऊर्जा आवश्यकताओं का लगभग 60% और इसके विद्युत उत्पादन का 70% हिस्सा बना हुआ है। जबकि नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ाने के प्रयास चल रहे हैं, मंत्री ने पुन: पुष्टि की कि निकट भविष्य में कोयला भारत के ऊर्जा और औद्योगिक परिदृश्य का केंद्र बना रहेगा।
रेड्डी ने इस्पात निर्माण में महत्वपूर्ण कोकिंग कोयले के बारे में बताया कि इस्पात उत्पादन लागत में इसकी हिस्सेदारी लगभग 42% है। भारत वर्तमान में अपनी कोकिंग कोयले की आवश्यकता का लगभग 85% आयात करता है जिससे उद्योग अंतरराष्ट्रीय मूल्य अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के प्रति संवेदनशील हो जाता है। इसके लिए सरकार ने 2021 में मिशन कोकिंग कोयला शुरू किया जिसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता को कम करना, घरेलू उत्पादन को 140 मीट्रिक टन करना और 2030 तक इस्पात निर्माण में घरेलू कोयले के मिश्रण को 10% से बढ़ाकर 30% करना है।
इस मिशन के तहत प्रमुख पहलों में नई खोज क्षेत्रों की पहचान, मौजूदा खदानों से उत्पादन को बढ़ावा देना, कोयला धुलाई क्षमता में वृद्धि करना और निजी उद्यमों को नए कोकिंग कोयला ब्लॉक की नीलामी करना शामिल है। स्टैम्प चार्जिंग जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाने को प्रोत्साहित किया गया है ताकि गुणवत्ता से समझौता किए बिना उच्च-राख वाले घरेलू कोयले का उपयोग किया जा सके। इस मिशन का लक्ष्य 2030 तक 58 मीट्रिक टन कोयला धुलाई क्षमता का निर्माण और 23 मीट्रिक टन धुले हुए कोकिंग कोयले की आपूर्ति करना भी है।