22/10/25

अन्नकूट पर्व पर अम्बाला छावनी में जगह-जगह लगे भंडारे, पंडित देव प्रताप पाठक ने सुनाई अन्नकूट की कथा

जे कुमार, अम्बाला 22 अक्तूबर - अन्नकूट के पावन अवसर पर अंबाला छावनी में भक्ति और उत्साह का वातावरण देखने को मिला। छावनी के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा भंडारे आयोजित किए गए, जहां भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया और अन्नकूट पर्व के महत्व को जाना। लालकुर्ती बाजार स्थित सनातन धर्म शिव मंदिर में विशेष आयोजन हुआ, जिसमें मंदिर के पुजारी पंडित देव प्रताप पाठक ने श्रद्धालुओं को अन्नकूट की पौराणिक कथा सुनाई।

पंडित देव प्रताप पाठक ने बताया कि अन्नकूट पर्व भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र देव के अहंकार को शांत करने और ब्रजवासियों की रक्षा के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। जब इंद्र देव ने ब्रज में लगातार वर्षा कर दी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर सभी को आश्रय दिया। इसके बाद ब्रजवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण का धन्यवाद अर्पित करते हुए विविध प्रकार के व्यंजनों का अन्नकूट तैयार किया और भगवान को भोग लगाया। इस परंपरा के चलते आज भी अन्नकूट पर्व पर विभिन्न पकवानों से भोग बनाकर भगवान को अर्पित किया जाता है और प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

लालकुर्ती बाजार में आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ देखने को मिली। सभा द्वारा भंडारे की सुंदर व्यवस्था की गई, जिसमें खिचड़ी, पूरी-सब्जी, हलवा आदि प्रसाद वितरित किया गया। भक्तों ने भक्ति भाव से पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया और मंदिर प्रांगण में भजन-कीर्तन के सुर गूंजते रहे। अंबाला छावनी के इस धार्मिक आयोजन ने अन्नकूट पर्व की परंपरा को और भी जीवंत बना दिया तथा समाज में प्रेम, एकता और सेवा का संदेश दिया।

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