पशु प्रबंधन पर आर्य कॉलेज में विशेष कार्यशाला: आवारा कुत्तों और बेसहारा पशुओं की समस्या पर चर्चा

जे कुमार अम्बाला 17 दिसम्बर 2025 : - आर्य कॉलेज के प्रांगण में सरकार की विशेष मुहिम के तहत आवारा कुत्तों एवं पशुओं के उचित प्रबंधन पर एक दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन किया गया। वर्तमान समय में बेसहारा पशुओं की बढ़ती संख्या एक गंभीर सामाजिक समस्या बन गई है, जिससे सुरक्षा, यातायात और पशु कल्याण तीनों प्रभावित हो रहे हैं।

समस्या के मुख्य कारण और प्रभाव : - कार्यशाला में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि इस समस्या के पीछे प्रमुख कारण गौशालाओं की कमी और आवारा कुत्तों के लिए उचित आवास का अभाव है। सुरक्षा जोखिम: आवारा कुत्तों के काटने से रेबीज जैसी घातक बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। सामाजिक भय: बच्चों और बुजुर्गों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। यातायात बाधित: सड़कों पर पशुओं के जमावड़े से दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है।

समाधान हेतु प्रस्तावित कदम : - महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अंजु बाला और नोडल ऑफिसर डॉ. सरिता चौधरी ने इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने पर ज़ोर दिया | पशु जन्म नियंत्रण (ABC): नसबंदी कार्यक्रमों के माध्यम से जनसंख्या को नियंत्रित करना। टीकाकरण: रेबीज को रोकने के लिए नियमित टीकाकरण अभियान चलाना। आश्रय गृह: अधिक गौशालाओं और पशु आश्रय गृहों (Shelters) का निर्माण। जन जागरूकता: नागरिकों को पशुओं के प्रति मानवीय दृष्टिकोण रखने और प्रभावी कानूनों के प्रति जागरूक करना।

सफल आयोजन : - कमलेश गोयल ने इस बात पर बल दिया कि इस सामाजिक मुद्दे के प्रति हर नागरिक का जागरूक होना आवश्यक है। कार्यशाला का सफल संचालन डॉ. प्रगति शर्मा और डॉ. गुरमीत कौर की देखरेख में संपन्न हुआ।

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