लोन रिकवरी में देरी पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी: पानीपत DC और SP को 30 दिन में बैंक को कब्जा दिलाने के आदेश

हरियाणा, 22 अगस्त (अन्‍नू): पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लोन रिकवरी मामलों में जिला प्रशासन की सुस्ती और ढुलमुल रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया है। उज्जजीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पानीपत के उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) को सख्त निर्देश जारी किए हैं।

जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने आदेश दिए हैं कि 30 दिनों के भीतर बैंक को उसकी बंधक (Mortgaged) संपत्ति का भौतिक कब्जा दिलाया जाए, ताकि बैंक कानून के तहत अपनी बकाया राशि की वसूली कर सके। इसके साथ ही अदालत ने जिला प्रशासन को 45 दिनों के भीतर इस आदेश की अनुपालन रिपोर्ट हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

'NPA देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ'; प्रशासनिक लापरवाही पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी:

  • अधिकारियों की लापरवाही पर सवाल: हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि जिला मजिस्ट्रेट द्वारा 17 दिसंबर 2025 को सरफेसी एक्ट की धारा 14 के तहत आदेश जारी किए जाने के बावजूद बैंक को कब्जा न दिलाना काफी हैरान करने वाला है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अपनी वैधानिक जिम्मेदारी न निभाना सीधी लापरवाही को दर्शाता है।

  • अर्थव्यवस्था पर असर: खंडपीठ ने कहा कि नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बैंकिंग व्यवस्था और देश के खजाने पर भारी बोझ हैं। बैंकिंग सिस्टम में तरलता (Liquidity) बनाए रखने के लिए सरफेसी एक्ट के तहत रिकवरी प्रक्रिया में तेजी लाना बेहद जरूरी है।

  • पुलिस सहायता के निर्देश: हाईकोर्ट ने रिट ऑफ मंडामस (Right of Mandamus) जारी करते हुए पानीपत DC और SP को बैंक को तुरंत आवश्यक प्रशासनिक सहयोग और पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

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