अंबाला: मोती नगर के श्री कबीर आश्रम में शिव महापुराण कथा; आचार्य सनातन चैतन्य ने सुनाया गणेश-कार्तिकेय प्रसंग
अंबाला, 14 अगस्त (अन्नू): मोती नगर स्थित श्री कबीर आश्रम, नगर खेड़ा में आयोजित श्रावणी शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यासपीठ से आचार्य सनातन चैतन्य महाराज ने भगवान गणेश और स्वामी कार्तिकेय के जन्म एवं ब्रह्मांड परिक्रमा के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने संदेश दिया कि माता-पिता की निस्वार्थ सेवा और उनके चरणों में ही संपूर्ण ब्रह्मांड समाहित है।
विवेक और भक्ति भाव से गणेश जी बने 'प्रथम पूज्य'
विवाह की शर्त और कार्तिकेय जी की यात्रा: आचार्य ने बताया कि जब गणेश और कार्तिकेय के विवाह को लेकर स्थिति बनी, तो भगवान शिव ने शर्त रखी कि जो सबसे पहले ब्रह्मांड की परिक्रमा पूरी करेगा, उसका विवाह पहले होगा। शर्त सुनते ही कार्तिकेय अपने वाहन मयूर (मोर) पर सवार होकर परिक्रमा के लिए निकल पड़े।
माता-पिता की परिक्रमा: मूषक सवारी होने के कारण गणेश जी ने अपने विवेक का परिचय दिया। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती को एक स्थान पर बैठाकर उनकी परिक्रमा पूरी की।
कैलाश पर आनंद उत्सव: गणेश जी के इस भक्ति भाव को देखकर सभी देवी-देवताओं ने उन्हें 'गणाध्यक्ष' और 'प्रथम पूज्य' घोषित किया।
श्री शैल पर्वत रवाना हुए कार्तिकेय: ब्रह्मांड की परिक्रमा कर लौटने पर जब कार्तिकेय जी को इसका ज्ञान हुआ, तो वे रुष्ट होकर दक्षिण दिशा में स्थित श्री शैल पर्वत की ओर चले गए।
आरती के बाद बांटा गया प्रसाद; कई श्रद्धालु रहे मौजूद
कार्यक्रम के समापन पर पंडित रविंद्र नाथ तिवारी एवं पंडित देवीप्रसाद भारद्वाज ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ स्वस्ति वाचन कराया, जिसके बाद भव्य आरती आयोजित की गई और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।
इस धार्मिक आयोजन में मुख्य यजमान गोयल परिवार, इंदुबाला अरोड़ा, लविश कुमार मोनू तथा सनातन प्रचार मंडल के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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