प्रयागराज में महाकुंभ की शुरुआत के साथ शाही स्नान शुरू
आरएस अनेजा, 14 जनवरी नई दिल्ली
प्रयागराज में आज से महाकुंभ की शुरुआत हो गई है। हिंदू धर्म में प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण है। यहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का संगम होता है, जिसे ‘त्रिवेणी संगम’ कहा जाता है। महाकुंभ का आयोजन भारत में चार जगहों प्रयागराज, नासिक, उज्जैन और हरिद्वार में होता है. इन पवित्र स्थलों पर होने वाले महापर्व का साधु-संतों और श्रद्धालुओं को बेसब्री से इंतजार होता है।
कहते हैं कि महाकुंभ में त्रिवेणी घाट पर स्नान करने से व्यक्ति को जीवन के समस्त पापों से मुक्ति मिल जाती है, जिससे आत्मा और शरीर दोनों ही शुद्ध हो जाता है. इसके साथ ही बता दें कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शाही स्नान का नाम बदलकर अमृत स्नान और नगर प्रवेश कर दिया है.
पहले शाही स्नान का शुभ मुहूर्त
महाकुंभ का पहला स्नान पौष पूर्णिमा तिथि को होगा। वैदिक पंचांग के अनुसार, पौष माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत सोमवार, 13 जनवरी को सुबह 5 बजकर 3 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन 14 जनवरी को रात 3 बजकर 56 मिनट पर होगा. वहीं शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं-
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 5 बजकर 27 मिनट से लेकर 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा.
विजय मुहूर्त- दोपहर 2 बजकर 15 मिनट से लेकर 2 बजकर 57 मिनट तक रहेगा
गोधूलि मुहूर्त- शाम 5 बजकर 42 से लेकर 6 बजकर 09 तक रहेगा
निशिता मुहूर्त- रात 12 बजकर 03 से लेकर 12 बजकर 57 तक रहेगा.
प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मे आज पहला शाही स्नान होगा. इसके बाद अन्य शाही स्नान की तिथियां कुछ इस प्रकार हैं-
मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025 के दिन दूसरा शाही स्नान होगा.
मौनी अमावस्या 29 जनवरी 2025 के दिन तीसरा शाही स्नान होगा.
बसंत पंचमी 3 फरवरी 2025 के दिन चौथा शाही स्नान होगा.
माघ पूर्णिमा 12 फरवरी 2025 के दिन पांचवा शाही स्नान होगा.
महाशिवरात्रि 26 फरवरी 2025 के दिन आखिरी शाही स्नान होगा.
शाही स्नान का नियम
महाकुंभ में शाही स्नान के कुछ खास नियमों का पालन किया जाता है. महाकुंभ में सबसे पहले नागा साधु स्नान करते हैं. नागा साधुओं को स्नान करने की प्राथमिकता सदियों से चली आ रही है. इसके पीछे एक धार्मिक मान्यता है. इसके अलावा गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए महाकुंभ में स्नान के नियम कुछ अलग हैं. गृहस्थ लोगों नागा साधुओं बाद ही संगम में स्नान करना चाहिए. स्नान करते समय 5 डुबकी जरूर लगाएं, तभी स्नान पूरा माना जाता है. स्नान के समय साबुन या शैंपू का इस्तेमाल न करें. क्योंकि इसे पवित्र जल को अशुद्ध करने वाला माना जाता है.