सुपवा में स्क्रीनप्ले राइटिंग सिखा रही हैं मशहूर फिल्म लेखिका पुबाली चौधरी, जीत चुकी हैं नेशनल और फिल्मफेयर अवार्ड

जे कुमार रोहतक, 18 मई 2026: दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसी-सुपवा), रोहतक के फिल्म एंड टेलीविजन (FTV) विभाग में इन दिनों फिल्मी पटकथा लेखन (स्क्रीनप्ले राइटिंग) को लेकर एक विशेष वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्कशॉप में देश की जानी-मानी और प्रतिष्ठित फिल्म लेखिका पुबाली चौधरी डायरेक्शन बैच के छात्रों को बॉलीवुड की बारीकियों और पटकथा लेखन के जरूरी टिप्स दे रही हैं।

नेशनल और फिल्मफेयर अवार्ड से हैं सम्मानित

फिल्म एंड टेलीविजन फैकेल्टी के एफसी महेश टीपी ने बताया कि पुबाली चौधरी भारतीय सिनेमा का एक बेहद प्रतिष्ठित नाम हैं। वे सुपरहिट हिंदी फिल्मों जैसे 'रॉक ऑन', 'काई पो चे' और 'रॉक ऑन-2' जैसी बेहतरीन फिल्मों की पटकथा लिख चुकी हैं। उनके शानदार लेखन के चलते:

  • साल 2008 में फिल्म 'रॉक ऑन' को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Award) से नवाजा गया था।

  • साल 2014 में फिल्म 'काई पो चे' को सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले के लिए प्रतिष्ठित फिल्मफेयर पुरस्कार (Filmfare Award) मिला।

  • पुबाली चौधरी देश के प्रीमियर संस्थान एफटीआईआई (FTII), पुणे में स्क्रीनप्ले लेखन विभाग में मेंटर और मानद विभागाध्यक्ष के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।

कैमरा वही कैप्चर कर सकता है जो वह देख और सुन सकता है: पुबाली चौधरी

वर्कशॉप के दौरान छात्रों से सीधा संवाद करते हुए पुबाली चौधरी ने स्क्रीनप्ले लेखन के मूल मंत्र साझा किए:

"स्क्रीनप्ले फिल्माए जाने के लिए लिखे जाते हैं, न कि पढ़े जाने के लिए। एक उपन्यासकार चरित्र के आंतरिक जीवन को तीन पैराग्राफ में लिख सकता है, लेकिन एक screenराइटर को उसी भावनात्मक स्थिति को एक्शन, व्यवहार या संवाद के माध्यम से दिखाना होता है। जब तक आंतरिक स्थितियां भौतिक दुनिया में दिखाई न दें, तब तक वे लेंस के लिए अदृश्य हैं।"

उन्होंने आगे समझाया कि स्क्रीनप्ले का मानक प्रारूप लगभग प्रति मिनट एक पृष्ठ (90 मिनट की फिल्म के लिए लगभग 90 पृष्ठ) चलता है। यहाँ हर शब्द की एक कीमत होती है, इसलिए पढ़ने की गति को धीमा करने वाले दृश्यों को तुरंत काट दिया जाता है। उन्होंने स्क्रीनप्ले को फिल्म का 'ब्लूप्रिंट' बताते हुए कहा कि यह एक सहयोगी दस्तावेज है, जिसे स्क्रीन तक पहुँचने से पहले निर्देशकों और निर्माताओं द्वारा कई बार री-राइट भी किया जाता है।

बॉलीवुड की जरूरतों के मुताबिक तैयार हो रहे छात्र

सुपवा के कुलगुरु डॉ. अमित आर्य ने इस शानदार पहल पर खुशी जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का हमेशा से यह प्रयास रहा है कि देश के सर्वश्रेष्ठ फिल्मी दिग्गजों और पटकथा लेखकों को छात्रों के बीच लाया जाए। इसके जरिए हमारे छात्र सीधे इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स से जमीनी अनुभव सीख पा रहे हैं और खुद को बॉलीवुड की आधुनिक जरूरतों के मुताबिक पूरी तरह तैयार कर रहे हैं।

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