रेलवे कर्मचारियों का फूटा गुस्सा: मांगों को लेकर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी, पुरानी पेंशन बहाली और 8वें वेतन आयोग पर अड़े
अंबाला, 19 मई (अन्नू): अंबाला में आयोजित उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन (URMU) के त्रिवार्षिक अधिवेशन के पहले ही दिन रेल कर्मचारियों का भारी आक्रोश देखने को मिला। इस महासम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान यूनियन के महामंत्री बीसी शर्मा ने रेल प्रशासन और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने साफ कहा कि यदि कर्मचारियों की 15 प्रमुख और ज्वलंत मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो आने वाले दिनों में देश स्तर पर 'रेल बचाओ कर्मचारी बचाओ' आंदोलन की शुरुआत कर दी जाएगी।
सरकार की नीतियों पर बरसे नेता, जम्मू से लेकर लखनऊ तक के हजारों कर्मी पहुंचे
अधिवेशन को संबोधित करते हुए एनएफआईआर (NFIR) के अध्यक्ष गुमान सिंह ने केंद्र सरकार की नीतियों को मजदूर विरोधी बताते हुए तीखा हमला बोला। अंबाला में हो रहे इस त्रिवार्षिक अधिवेशन में देश के विभिन्न हिस्सों जैसे जम्मू, फिरोजपुर, दिल्ली और लखनऊ सहित कई रेल मंडलों से हजारों की संख्या में रेल कर्मचारी हिस्सा लेने पहुंचे हैं। यूनियन नेताओं ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि अब आर-पार की लड़ाई का समय आ गया है।
'बुढ़ापा सुरक्षित तो दिमाग स्वस्थ' — एनपीएस और यूपीएस को रद्द करने की मांग
महामंत्री बीसी शर्मा ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की वकालत करते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि एक रेल कर्मचारी का दिमाग तभी शांत और स्वस्थ रह सकता है, जब उसका बुढ़ापा पूरी तरह सुरक्षित हो। उन्होंने मांग की कि नई पेंशन स्कीम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए और कर्मचारियों के हक में पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाए।
कोरोना काल में फ्रीज पदों को बहाल करने और 8वें वेतन आयोग पर रखीं ये मुख्य मांगें:
यूनियन ने रेल प्रशासन के सामने अपनी मांगों की पूरी फेहरिस्त रखी है, जिनमें मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
पदों की बहाली: कोरोना महामारी के दौरान फ्रीज किए गए 30,000 पदों को सरेंडर करने के सरकारी आदेश को 'तुगलकी फरमान' बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने और नई भर्तियां शुरू करने की मांग की गई।
8वां वेतन आयोग: आठवें वेतन आयोग के गठन के साथ ही इसमें 3.83 मल्टीप्लाई फैक्टर लागू करने की पुरजोर मांग उठाई गई।
फ्रीज डीए (DA): वैश्विक महामारी के समय रोकी गई महंगाई भत्ते (डीए) की तीनों किस्तों को तुरंत जारी करने की बात कही गई।
ठेकेदारी प्रथा पर रोक: रेलवे के विभिन्न विभागों में लगातार बढ़ रही ठेकेदारी प्रथा को पूरी तरह से बंद करने की मांग की गई।
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