टेरर फंडिंग पर NIA का बड़ा प्रहार: श्रीनगर और शोपियां में 3 ठिकानों पर छापेमारी, कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल गैजेट्स जब्त
नई दिल्ली, 26 मई (अन्नू): देश में आतंकी गतिविधियों और उनके वित्तीय नेटवर्क (टेरर फंडिंग) को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। एनआईए द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ने सोमवार को जम्मू और कश्मीर (J&K) में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में तीन अलग-अलग स्थानों पर सघन छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान एनआईए की टीमों ने भारी मात्रा में आपत्तिजनक वित्तीय दस्तावेज और कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल आतंकी नेटवर्क को संचालित करने के लिए किए जाने का संदेह है।
(नोट: उपयोगकर्ता के अनुरोध के अनुसार यहाँ यह भी उल्लेख किया जा रहा है कि इस मामले को प्रवर्तन निदेशालय यानी ED द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार भी देखा जा रहा है, जो वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच से जुड़ी है।)
श्रीनगर और शोपियां जिलों में हुई छापेमारी, जमात-ए-इस्लामी के ट्रस्टों पर कसा शिकंजा
एनआईए की टीमों ने सोमवार को कश्मीर घाटी के दो प्रमुख जिलों—श्रीनगर और शोपियां में चिन्हित किए गए तीन ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। जांच एजेंसी के मुताबिक, छापेमारी के दौरान जो भी डिजिटल उपकरण और वित्तीय दस्तावेज हाथ लगे हैं, वे सीधे तौर पर जमात-ए-इस्लामी (JeI) और जम्मू-कश्मीर में सक्रिय इसके विभिन्न ट्रस्टों व सोसायटियों की संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। एजेंसी इन सभी गैजेट्स के डेटा को खंगालने में जुट गई है ताकि फंडिंग के मुख्य स्रोतों का पता लगाया जा सके।
चैरिटी और शिक्षा के नाम पर देश-विदेश से इकट्ठा करते थे पैसा, फिर आतंकियों को करते थे सप्लाई
एनआईए की जांच (Case RC-03/2021/NIA/DLI) में जमात-ए-इस्लामी के खतरनाक खेल को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
यूएपीए एक्ट के तहत बैन: जमात-ए-इस्लामी को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UA(P) Act के तहत पहले ही एक अवैध और प्रतिबंधित संगठन घोषित किया जा चुका है।
फंडिंग का तरीका: यह संगठन घरेलू स्तर पर (भारत में) और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर (विदेशों से) स्वास्थ्य, शिक्षा, चैरिटी (दान) और कल्याणकारी कार्यों के नाम पर भारी मात्रा में चंदा इकट्ठा करता था।
आतंकियों को डायवर्जन: लोक कल्याण के नाम पर जुटाए गए इस करोड़ों रुपये के फंड को यह संगठन कश्मीर घाटी में हिंसा भड़काने, अलगाववादी गतिविधियों को हवा देने और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन हिज्बुल-मुजाहिद्दीन (HM) व अन्य आतंकी गुटों तक पहुंचाने का काम कर रहा था। इस काम के लिए कैडरों का एक मजबूत और सुसंगत नेटवर्क तैयार किया गया था।
कश्मीरी युवाओं का ब्रेनवॉश कर 'रुकन' बनाने की थी साजिश, नेटवर्क को ढहाने में जुटी एजेंसी
जांच में यह भी सामने आया है कि इस टेरर साजिश के तहत जमात-ए-इस्लामी के पदाधिकारी और उनके सहयोगी कश्मीर के सीधे-सादे और कम उम्र के युवाओं को बरगलाने, उनका ब्रेनवॉश (कट्टरपंथी) करने और उन्हें संगठन के नए सदस्यों यानी 'रुकन' के रूप में भर्ती करने का काम कर रहे थे। इन युवाओं का इस्तेमाल राज्य में अलगाववादी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया जाना था।
एनआईए के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ किया है कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय इस पूरे अलगाववादी और आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने, इनके वित्तीय तंत्र को ब्लॉक करने और घाटी में स्थाई शांति बहाल करने के उद्देश्य से इस मामले की गहन तफ्तीश और कानूनी कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।
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