पंजाब: रैश ड्राइविंग, ड्रिंक एंड ड्राइव और अंडरएज ड्राइविंग अब 'नॉन-कंपाउंडेबल' अपराध; सीधे जाना होगा कोर्ट
पंजाब, 26 जून (अन्नू): पंजाब में सड़कों पर हुड़दंग मचाने, शराब पीकर गाड़ी दौड़ाने और नाबालिगों के हाथों में वाहन सौंपने वालों के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कड़ाई शुरू कर दी है। पंजाब सरकार ने सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए ट्रैफिक नियम तोड़ने के तीन सबसे गंभीर मामलों—रैश ड्राइविंग (खतरनाक ड्राइविंग), ड्रिंक एंड ड्राइव (नशे में वाहन चलाना) और अंडरएज ड्राइविंग (नाबालिग द्वारा वाहन चलाना) को तत्काल प्रभाव से 'नॉन-कंपाउंडेबल' (Non-Compoundable) कैटेगरी में शामिल कर दिया है।
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की हरी झंडी मिलने के बाद परिवहन विभाग के सचिव वरुण रूजम (IAS) ने इस सख्त आदेश का नोटिफिकेशन जारी कर इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया है। परिवहन सचिव ने साफ निर्देश दिए हैं कि अब पुलिस या आरटीओ (RTO) विभाग इन चालानों का निपटारा अपने स्तर पर बिल्कुल नहीं करेंगे।
अब मौके पर या RTO दफ्तर में नहीं मरेगा चालान, काटने होंगे कोर्ट के चक्कर
पहले क्या थी व्यवस्था: अब तक व्यवस्था यह थी कि यदि कोई रेड लाइट जंप करते, गलत दिशा में गाड़ी चलाते या शराब पीकर गाड़ी चलाते पकड़ा जाता था, तो वह मामला 'कंपाउंडेबल' कैटेगरी में आता था। वाहन चालक मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिस अधिकारी या नजदीकी RTO दफ्तर में जाकर तय जुर्माना राशि (कंपाउंडिंग फीस) नकद या ऑनलाइन जमा कर देता था और चालान वहीं बंद हो जाता था।
अब क्या बदल गया: नए नोटिफिकेशन के बाद अब इन तीनों अपराधों को इस सूची से बाहर कर दिया गया है। अब पुलिस या परिवहन विभाग के पास पैसे लेकर चालान बंद करने का अधिकार ही नहीं बचा है। नियम तोड़ते ही पुलिस वाहन को जब्त कर सकती है या दस्तावेज ले सकती है, लेकिन इसका निपटारा केवल और केवल कोर्ट के माध्यम से होगा। वाहन चालक को कोर्ट से समन आएगा, मजिस्ट्रेट के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा और जज ही सजा या जुर्माना तय करेंगे। मामला गंभीर होने पर मौके पर ही जेल की सजा सुनाई जा सकती है।
आखिर सरकार को क्यों उठाना पड़ा यह बेहद सख्त कदम?
कानून का डर खत्म होना: ट्रैफिक एक्सपर्ट एवं रिटायर्ड एसीपी ट्रैफिक गुरदेव सिंह का कहना है कि लोग चालान कटने पर मौके पर ही भुगत कर आगे निकल जाते थे, जिससे उनमें कानून का खौफ खत्म हो गया था। अब कोर्ट और वकीलों के चक्कर काटने के डर से लोग नियमों का पालन करेंगे।
जानलेवा स्टंट और रॉन्ग साइड ड्राइविंग: लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और मोहाली जैसे बड़े शहरों में सोशल मीडिया रील्स के लिए खतरनाक स्टंट करने और शॉर्टकट के लिए रॉन्ग साइड गाड़ी चलाने का चलन बाढ़ की तरह बढ़ गया था, जिसे रोकने के लिए यह प्रहार जरूरी था।
अंडरएज ड्राइविंग से हादसे: माता-पिता आसानी से बच्चों को गाड़ियां सौंप देते थे, जो सड़कों पर काल बनकर दौड़ती थीं। कोर्ट से समन आने पर जब माता-पिता को खुद जज के सामने पेश होना पड़ेगा और फटकार लगेगी, तब वे बच्चों को वाहन देना बंद करेंगे।
ड्रिंक एंड ड्राइव का बढ़ता ग्राफ: वीकेंड्स और देर रात होने वाले अधिकांश जानलेवा हादसों में ड्राइवर के नशे में होने की पुष्टि होती है। जुर्माना देकर छूट जाने की सहूलियत के चलते लोग यह गलती बार-बार दोहरा रहे थे।
जानिए किन धाराओं के तहत बदला नियम और कितनी होगी जेल-जुर्माना:
1. धारा 184 — खतरनाक तरीके से वाहन चलाना (Rash Driving)
अगर कोई भी व्यक्ति ट्रैफिक सिग्नल तोड़कर गाड़ी तेजी से निकालता है, जेब्रा क्रॉसिंग या स्टॉप बोर्ड के नियमों का उल्लंघन करता है, रॉन्ग साइड गाड़ी चलाकर दूसरों की जान खतरे में डालता है, तो वह इस धारा के तहत कोर्ट जाएगा।
सजा: पहली बार पकड़े जाने पर 6 महीने से 1 साल तक की जेल या ₹1,000 से ₹5,000 तक का जुर्माना (या दोनों) हो सकता है।
दूसरी बार पकड़े जाने पर: यदि 3 साल के भीतर दोबारा यही गलती की, तो 2 साल तक की जेल और ₹10,000 तक का जुर्माना होगा। साथ ही कोर्ट ड्राइविंग लाइसेंस (DL) भी रद्द कर सकता है।
2. धारा 185 और 188 — शराब या ड्रग्स के नशे में गाड़ी चलाना (Drink & Drive)
सरकार ने इसके खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई है। धारा 185 के तहत यदि किसी ड्राइवर के 100 मिलीलीटर रक्त में 30 मिलीग्राम से अधिक अल्कोहल पाया जाता है तो वह दोषी है। वहीं धारा 188 के तहत यदि वाहन का मालिक जानबूझकर किसी नशेड़ी को गाड़ी देता है या नशे में धुत ड्राइवर की बगल वाली सीट पर बैठकर उसे बढ़ावा देता है, तो वह भी बराबर का दोषी होगा।
सजा: पहली बार में 6 महीने तक की जेल और ₹10,000 का जुर्माना। दूसरी बार कोर्ट में मामला पहुंचने पर जुर्माना ₹15,000 और जेल की सजा 2 साल तक हो सकती है।
3. धारा 199A — अंडरएज ड्राइविंग (Underage Driving)
यदि 18 वर्ष से कम उम्र का बच्चा कार, बाइक या स्कूटी दौड़ाते पकड़ा गया, तो यह नियम बच्चे से ज्यादा उसके माता-पिता या वाहन मालिक की रातें हराम कर देगा।
सजा: इसमें सीधे नाबालिग के माता-पिता या वाहन मालिक को दोषी मानकर ₹25,000 का भारी-भरकम जुर्माना और सीधे 3 साल तक की जेल का प्रावधान है।
अतिरिक्त कार्रवाई: वाहन का रजिस्ट्रेशन (RC) पूरे 12 महीने के लिए रद्द कर दिया जाएगा। नियम तोड़ने वाले नाबालिग का ड्राइविंग लाइसेंस (DL) 25 वर्ष की उम्र होने तक किसी भी कीमत पर नहीं बन सकेगा। इसके अलावा नाबालिग के खिलाफ जूवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के तहत अलग से केस चलेगा।
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