पंजाब की राजनीति में उबाल: पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के बयान और सीएम मान के वायरल वीडियो पर बरसे इकबाल सिंह लालपुरा

चंडीगढ़,  08 जनवरी (अन्‍नू ) : पंजाब में आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच सियासी टकराव चरम पर पहुंच गया है। दिल्ली विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी द्वारा कथित रूप से सिख गुरुओं के अपमानजनक संदर्भ और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक वायरल वीडियो को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता व राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा ने मोर्चा खोल दिया है। चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से रूबरू होते हुए लालपुरा ने 'आप' के सिख नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए और मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की।

गुरु साहिब के अपमान पर तीखे सवाल लालपुरा ने आरोप लगाया कि दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही के दौरान आतिशी ने बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे खुद विधानसभा स्पीकर ने भी स्वीकार किया कि शब्द गलत थे। लालपुरा ने भावुक होते हुए कहा कि एक सिख होने के नाते वे उन शब्दों को दोहरा भी नहीं सकते। उन्होंने अरविंद केजरीवाल से पूछा कि गुरु साहिब का अपमान करने वाली नेता को अब तक दंडित क्यों नहीं किया गया और पंजाब के 'आप' नेता इस गंभीर मुद्दे पर मौन क्यों साधे हुए हैं।

सीएम मान के वीडियो की सीबीआई जांच की मांग मुख्यमंत्री भगवंत मान के सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक विवादित वीडियो का जिक्र करते हुए लालपुरा ने इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चूंकि मामला सीधे राज्य के मुखिया से जुड़ा है, इसलिए पंजाब पुलिस इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कर पाएगी। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री को तुरंत पद छोड़ देना चाहिए या पार्टी उन्हें बर्खास्त करे, ताकि सीबीआई इस पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने ला सके। उन्होंने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि मुखिया की छवि पर सवाल हों, तो जनता की सुरक्षा राम भरोसे ही है।

धार्मिक विवादों पर रुख गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पावन स्वरूपों के लापता होने के मामले पर पूर्व आईपीएस अधिकारी लालपुरा ने स्पष्ट किया कि हालांकि वे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते, लेकिन यदि इसमें कोई कानूनी अपराध हुआ है, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, मुख्यमंत्री को 'पतित सिख' कहे जाने के विवाद पर उन्होंने कहा कि धर्म में इंसान या तो 'गुरमुख' (गुरु के बताए रास्ते पर चलने वाला) होता है या 'मनमुख' (मनमर्जी करने वाला); और मुख्यमंत्री के आचरण को देखते हुए उन्हें 'मनमुख' कहना ही तर्कसंगत होगा।

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