पिंजौर हत्याकांड: कोर्ट का पंचकूला पुलिस पर कड़ा रुख; हिरासत में प्रताड़ना, जबरन सिर मुंडवाने के आरोपों की विभागीय जांच के आदेश
पंचकूला, 6 जुलाई (अन्नू): हरियाणा के पंचकूला जिले के पिंजौर के बहुचर्चित जितेश मनोचा उर्फ किट्टू हत्याकांड में एक नया और बड़ा मोड़ आ गया है। मामले में गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस हिरासत में प्रताड़ित करने, जबरन सिर मुंडवाने, नंगे पैर सार्वजनिक सड़कों पर चलाने और मीडिया के सामने परेड कराकर अपमानित करने के गंभीर आरोपों को लेकर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
कालका के सब-डिवीजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (SDJM) अभिमन्यु राजपूत ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पंचकूला के पुलिस कमिश्नर (CP) को पूरे मामले की उच्च स्तरीय विभागीय जांच कराने और समयबद्ध रिपोर्ट सीधे कोर्ट में पेश करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
कानून हाथ में नहीं ले सकती पुलिस: कोर्ट
माननीय कोर्ट ने अपने लिखित आदेश में कानून की मर्यादा को सर्वोपरि बताते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी को तय कानून से अलग जाकर अपनी तरफ से दंड देना, पुलिस हिरासत में थर्ड डिग्री या हिंसा का इस्तेमाल करना, सार्वजनिक रूप से उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाकर अपमानित करना या उन्हें जबरन मीडिया ट्रायल का हिस्सा बनाना किसी भी सूरत में न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे कृत्य स्थापित कानून और मानवाधिकारों के पूरी तरह विरुद्ध हैं, इसलिए इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना बेहद आवश्यक है।
क्राइम ब्रांच/CIA परिसर में सीसीटीवी कैमरा ही नहीं
सुनवाई के दौरान जब अदालत ने सीआईए और क्राइम ब्रांच के कामकाज पर सवाल उठाए, तो चौंकाने वाली बात सामने आई। क्राइम ब्रांच, डिटेक्टिव स्टाफ और चंडीमंदिर थाने के तत्कालीन प्रभारियों ने कोर्ट में आधिकारिक बयान देते हुए स्वीकार किया कि:
"क्राइम ब्रांच/सीआईए (CIA) परिसर के भीतर कोई भी सीसीटीवी (CCTV) कैमरा स्थापित नहीं है, इसलिए वहां की कोई भी सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध या रिकॉर्डेड नहीं है।"
परिसर में कैमरे न होने की इस बात ने तकनीकी साक्ष्यों की उपलब्धता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
आरोपी रोहित मेहता ने कोर्ट में दी थी अर्जी, क्या था मामला?
बता दें कि यह पूरा मामला बीते 5 जून 2026 को पिंजौर के मुख्य बाजार में दिनदहाड़े हुई जितेश मनोचा उर्फ किट्टू की जघन्य हत्या से जुड़ा हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में पुलिस ने छह नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी के बाद मुख्य आरोपी रोहित मेहता ने अपने वकील के माध्यम से कोर्ट में एक विशेष आवेदन (Application) देकर पुलिसिया बर्बरता के आरोप लगाए थे। रोहित का आरोप था कि पुलिस रिमांड के दौरान उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जबरन उनके सिर मुंडवा दिए गए, उन्हें नंगे पैर मुख्य सड़कों पर पैदल चलाया गया और उनकी गरिमा को धूमिल करने के लिए उनकी तस्वीरें व वीडियो जानबूझकर सोशल मीडिया और मीडिया में सार्वजनिक किए गए। आरोपी ने इस संबंध में मेडिकल बोर्ड से जांच कराने, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट: 3 आरोपियों के शरीर पर चोटों के निशान
रोहित मेहता की अर्जी पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने पहले तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों के एक स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड का गठन कर आरोपियों का मेडिकल टेस्ट कराया था।
चोटों की पुष्टि: मेडिकल बोर्ड की आधिकारिक रिपोर्ट में आरोपी खुशदीप सिंह, रोहित मेहता और मनप्रीत सिंह के शरीर पर तीन से पांच दिन पुरानी कई साधारण चोटों (Simple Injuries) का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
हड्डी टूटने की पुष्टि नहीं: हालांकि, राहत की बात यह रही कि डॉक्टरों द्वारा कराई गई एक्स-रे (X-Ray) रिपोर्ट में किसी भी आरोपी की हड्डी टूटने या कोई गंभीर आंतरिक फ्रैक्चर होने की पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस का तर्क: हिरासत से भागने के प्रयास में लगी थीं चोटें
दूसरी तरफ, पंचकूला पुलिस ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने दलील दी कि दो आरोपियों को जो चोटें लगी हैं, वे उनके पुलिस हिरासत से भागने के प्रयास (Attempt to Escape) के दौरान लगी थीं, जिस संबंध में पुलिस ने नियमानुसार आरोपियों के खिलाफ अलग से एक नई एफआईआर (FIR) भी दर्ज कर रखी है।
सार्वजनिक रूप से घुमाने और परेड कराने के आरोप पर पुलिस ने सफाई दी कि केस से जुड़े हथियारों की बरामदगी (Recovery) और अन्य अहम जांच कार्यों के लिए आरोपियों को विभिन्न सार्वजनिक और घटना से जुड़े स्थानों पर ले जाना बेहद आवश्यक था, इसके पीछे पुलिस का उद्देश्य किसी भी आरोपी को अपमानित करना या उनका तमाशा बनाना बिल्कुल नहीं था।
सिर मुंडाने के पहलू की गहन जांच करेगी पुलिस कमिश्नर की टीम
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से एक गहन जांच का विषय है कि क्या आरोपियों को जानबूझकर कानून का उल्लंघन कर, सिर मुंडवाकर सार्वजनिक रूप से जनता के बीच घुमाया गया या नहीं। कोर्ट ने साफ किया कि यदि विभागीय जांच में ऐसा होना सच पाया जाता है, तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
इसी वजह से पुलिस कमिश्नर को सीधे निर्देश जारी किए गए हैं कि वे इस मामले की चल रही लंबित जांच में इस विशेष पहलू को भी शामिल करें या फिर इसके लिए एक अलग स्वतंत्र जांच कमेटी का गठन कर समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें।
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