22/09/25

नरेगा आखर बना सहारा...दूर हो रहा अज्ञानता का अंधियारा

एन.एस.बाछल, 22 सितम्बर, जयपुर।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रेरणा से जयपुर जिला प्रशासन द्वारा संचालित 'नरेगा आखर' अभियान शिक्षा से सशक्तीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत कार्यरत निरक्षर श्रमिकों के जीवन में नरेगा आखर ने शिक्षा का उजियारा लाने का काम किया है। जयपुर जिला प्रशासन की पहल पर ग्रामीण विकास विभाग, साक्षरता एवं सतत शिक्षा विभाग और प्रारंभिक शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयास से शुरू हुई अभिनव पहल 'नरेगा आखर' अभियान महज साक्षरता का नहीं, सशक्तीकरण का आंदोलन भी साबित हो रहा है, जिससे श्रमिक आत्मनिर्भर के साथ-साथ सामाजिक बदलाव के वाहक भी बन गए हैं।

जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतिभा वर्मा ने बताया कि जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशन में संचालित नरेगा आखर अभियान के तहत जयपुर में कार्यरत कुल 2 लाख 14 हजार 907 मनरेगा श्रमिकों में सर्वे के बाद 46 हजार 791 श्रमिक निरक्षर पाए गए। नरेगा आखर अभियान के तहत अब तक जयपुर जिले में प्रशिक्षण प्राप्त 3 हजार 866 मेटों एवं कार्मिकों ने 45 हजार 840 मनरेगा श्रमिकों को उल्लास पोर्टल पर पंजीकृत करने के पश्चात 41 हजार 805 श्रमिकों को हस्ताक्षर करना, 35 हजार 713 श्रमिकों को सामान्य अक्षर ज्ञान, 27 हजार 611 श्रमिकों को बुनियादी संख्यात्मक ज्ञान हासिल करवाने में सफलता हासिल की है।

उन्होंने बताया कि नरेगा आखर अभियान की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रविवार को आयोजित बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक एसेसमेंट टेस्ट में 30 हजार से अधिक मनरेगा श्रमिकों ने उत्साह, उमंग और उल्लास के साथ भाग लिया।

नरेगा कार्यस्थल अब केवल मजदूरी की जगह नहीं, बल्कि वे अब ज्ञान और सशक्तीकरण के केंद्र बनकर उभर रहे हैं। जयपुर जिला प्रशासन की पहल से सैकड़ों ग्रामीण श्रमिकों की जिंदगी की दशा और दिशा बदलती नजर आ रही है। यह अभियान सिर्फ अक्षरज्ञान नहीं सिखाता, बल्कि आत्मविश्वास, अधिकारों की समझ और तकनीकी युग में कदम से कदम मिलाकर चलने की ताकत भी देता है।

मनरेगा योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में महिला मेटों के माध्यम से निरक्षर श्रमिकों को शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से सशक्त बनाने की यह योजना ग्रामीण विकास विभाग, साक्षरता एवं सतत शिक्षा विभाग और प्रारंभिक शिक्षा विभाग के समन्वय से शुरू की गई है। गांवों में नरेगा कार्यस्थलों पर दिनभर पसीना बहाने के बाद श्रमिक अब पंक्तिबद्ध बैठकर क, ख, ग से शुरुआत कर रहे हैं।

आखर की अलख के आंदोलन का यह दृश्य किसी क्रांति से कम नहीं है। महिलाओं की आंखों में आत्मविश्वास की चमक है, पुरुषों के चेहरों पर उम्मीद की मुस्कान देखने को मिल रही है। 'नरेगा आखर' का मकसद नरेगा कार्यस्थलों को केवल मजदूरी के स्थान नहीं, बल्कि ज्ञान और आत्मबल के केंद्र के रूप में विकसित करना है। अभियान के तहत इन श्रमिकों को न केवल पढ़ना-लिखना सिखाया जाएगा, बल्कि बैंकिंग, सरकारी योजनाओं की समझ और मोबाइल जैसी डिजिटल तकनीक के सुरक्षित उपयोग की जानकारी भी दी जाएगी। अभियान के लिए छह माह की कार्ययोजना तैयार की गई है।

प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स ने ग्राम पंचायत स्तर पर अन्य महिला मेट्स और श्रमिकों को प्रशिक्षण प्रदान किया। इस प्रकार एक प्रशिक्षक श्रृंखला के माध्यम से साक्षरता का दीप गांव-गांव तक पहुंचा रहे हैं। नरेगा आखर के तहत प्रत्येक ब्लॉक में उपखंड अधिकारी सप्ताह में दो कार्यस्थलों का निरीक्षण कर अभियान की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा कर रहे हैं। ब्लॉक स्तरीय नोडल अधिकारी भी प्रति सप्ताह चार कार्यस्थलों का दौरा कर प्रगति रिपोर्ट जिला नोडल अधिकारी को सौंप रहे हैं। जिला परिषद जयपुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को इस अभियान का जिला स्तरीय नोडल प्रभारी बनाया गया है।

गुरुपूर्णिमा के दिन शुरू हुए नरेगा आखर अभियान के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार की गई। जिसके तहत एक्टिव श्रमिकों की सूची तैयार करना, निरक्षर नरेगा श्रमिकों की सूची तैयार करना, प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करवाकर प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए प्रशिक्षक टीम तैयार करना और महिला मेटों को प्रशिक्षित करना, नरेगा कार्यस्थल पर कार्यरत निरक्षर नरेगा श्रमिकों को हस्ताक्षर सिखाना, बुनियादी साक्षरता में पढ़ना, लिखना, गिनती करना, वित्तीय साक्षरता की बात करें तो बैंकिंग, खाता संचालन, एटीएम,यूपीआई, सरकारी योजनाओं से जुड़ाव, डिजिटल साक्षरता में मोबाइल फोन का सुरक्षित उपयोग, ऐप्स की जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड की सुरक्षा, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं और अन्य योजनाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी।

अभियान के आगामी चरण में वित्तीय-बैंकिंग पाठ्यक्रम के लिए प्रत्येक नरेगा कार्यस्थल पर कार्यशाला आयोजित की जाएगी। यह सभी चरण पूरे करने के बाद असेसमेंट टेस्ट का आयोजन किया जा रहा है। यदि इस टेस्ट में कोई श्रमिक फेल हो जाता है तो दोबारा ट्रेनिंग दौर से गुजरने के बाद फिर से टेस्ट देना होगा। असेसमेंट टेस्ट में पास होने पर नरेगा श्रमिकों को सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।

'नरेगा आखर' केवल अक्षरज्ञान का माध्यम नहीं है, यह सामाजिक बदलाव की शुरुआत है। निरक्षरता के अंधकार में जीवन बिता रहे श्रमिक अब न केवल पढ़ना-लिखना सीखेंगे, बल्कि अपने अधिकारों, दायित्वों और अवसरों के प्रति जागरूक होकर बेहतर भविष्य की ओर कदम बढ़ाएंगे। यह पहल नरेगा को नई पहचान दिलाने के साथ ही गांवों के विकास की दिशा में एक ठोस कदम साबित होगी।

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