नई दिल्ली: दुनिया के आधे से ज्यादा देशों ने स्कूलों में मोबाइल फोन पर लगाई पाबंदी, यूनेस्को की रिपोर्ट में खुलासा
जे कुमार नई दिल्ली, 23 मार्च 2026: बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और गिरते शैक्षणिक स्तर को देखते हुए दुनिया भर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। यूनेस्को (UNESCO) की 'ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग' (GEM) टीम की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अब दुनिया के 58 प्रतिशत देशों (लगभग 114 शिक्षा प्रणालियों) ने स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया है।
तेजी से बढ़ा प्रतिबंध का दायरा: रिपोर्ट के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जून 2023 में जहां केवल 24 प्रतिशत देशों में यह पाबंदी थी, वहीं मार्च 2026 तक यह आंकड़ा दोगुने से भी अधिक होकर 58 प्रतिशत तक पहुँच गया है। हाल ही में इस सूची में बोलीविया, क्रोएशिया, मालदीव और माल्टा जैसे देश भी शामिल हुए हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देश पहले ही सख्त नियम लागू कर चुके हैं। स्वीडन ने भी घोषणा की है कि वह अगस्त 2026 से पूरे देश के स्कूलों में फोन पूरी तरह बैन कर देगा।
प्रतिबंध के पीछे के मुख्य कारण: विशेषज्ञों के अनुसार, यह सख्त कदम उठाने के पीछे तीन प्रमुख चिंताएं हैं:
एकाग्रता में कमी: क्लासरूम में मोबाइल की मौजूदगी से छात्रों का ध्यान भटकता है, जिससे सीखने की क्षमता प्रभावित होती है।
साइबर बुलिंग: स्कूलों में डिजिटल उपकरणों के कारण साइबर बुलिंग के मामले तेजी से बढ़े हैं।
मानसिक स्वास्थ्य: सोशल मीडिया के अत्यधिक प्रभाव के कारण बच्चों, विशेषकर लड़कियों में ईटिंग डिसऑर्डर और बॉडी इमेज जैसी मानसिक समस्याएं देखी जा रही हैं।
यूनेस्को का कहना है कि तकनीक शिक्षा का पूरक होनी चाहिए, विकल्प नहीं। हालांकि, कुछ देश पूर्ण प्रतिबंध के बजाय स्कूलों को स्वायत्तता दे रहे हैं कि वे अपनी सुविधा के अनुसार नियम बनाएं। भारत में भी कई राज्यों में स्कूल स्तर पर इस तरह की पाबंदियां पहले से ही प्रभावी हैं।
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