रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की डीपीएसयू के कामकाज की समीक्षा; ₹1.8 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन का बना रिकॉर्ड
आरएस अनेजा, 2 सितंबर नई दिल्ली - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2 सितंबर को नई दिल्ली में 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) के वार्षिक कामकाज की समीक्षा की। बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ को (रक्षा उत्पादन) सचिव संजीव कुमार तथा डीपीएसयू के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकों (सीएमडी) ने अपने-अपने संस्थानों के कामकाज, प्रमुख उपलब्धियों व भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।
रक्षा मंत्री ने स्वदेशी उत्पादन और विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने, उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियां विकसित करने, रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने तथा प्रमुख परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की दिशा में डीपीएसयू की प्रगति की समीक्षा की।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में भारत के रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूत करने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के साथ-साथ एक सशक्त रक्षा औद्योगिक आधार तैयार करने में डीपीएसयू के निरंतर योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि सभी 16 डीपीएसयू विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपलब्धियां दर्ज कर रहे हैं। श्री सिंह ने डीपीएसयू के निरंतर समर्पण व उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन हासिल किया, जिसमें डीपीएसयू का योगदान करीब 1.29 लाख करोड़ रुपये रहा है। रक्षा मंत्री ने इस उपलब्धि को आत्मनिर्भर रक्षा औद्योगिक आधार विकसित करने की दिशा में देश की महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक बताया।
राजनाथ सिंह ने डीपीएसयू से समय पर वितरण सुनिश्चित करने, आयात पर निर्भरता कम करने, अनुसंधान एवं विकास को तकनीकी नेतृत्व में बदलने, रक्षा निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जाने, पूंजीगत व्यय कैपेक्स के विस्तार के साथ उत्पादकता बढ़ाने, स्टार्टअप और एमएसएमई को अधिक सहयोग देने तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप गुणवत्ता हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि डीपीएसयू की प्रगति केवल आर्थिक या औद्योगिक आवश्यकता नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। रक्षा मंत्री ने हाल के वैश्विक संघर्षों ने दिखाया है कि किसी भी देश के लिए भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला, जरूरत पड़ने पर उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ाने की क्षमता, आवश्यक स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता, तेज मरम्मत क्षमता और लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों के दौरान उत्पादन जारी रखने की क्षमता कितनी महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के दौरान सात डीपीएसयू यानी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई), बीईएमएल और मिधानी के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी पर कुल 3,951 करोड़ रुपये के लाभांश के चेक रक्षा मंत्री को सौंपे।
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