21/05/25

मिजोरम ने पूर्ण साक्षरता प्राप्त की

आरएस अनेजा, 21 मई नई दिल्ली

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने आधिकारिक तौर पर मिजोरम को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया, जो राज्य की शैक्षिक यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस उपलब्धि के साथ मिजोरम पूर्ण साक्षरता प्राप्त करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।

राज्य की राजधानी आइजोल में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान इसकी घोषणा की गई।

मिजोरम, जिसे 20 फरवरी 1987 को राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ। यह प्रदेश 21,081 वर्ग किमी (8,139 वर्ग मील) के भौगोलिक क्षेत्र में फैला हुआ है। 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी साक्षरता दर 91.33% दर्ज की गई, जो भारत में तीसरे स्थान पर है। इस मजबूत नींव पर काम करते हुए शेष अनपढ़ व्यक्तियों की पहचान करने और उन्हें शिक्षित करने के लिए उल्लास - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम) लागू किया गया।

अगस्त-सितंबर 2023 में राज्य भर में क्लस्टर संसाधन केंद्र समन्वयकों (सीआरसीसी) द्वारा किए गए घर-घर सर्वेक्षण में 3,026 अनपढ़ लोगों की पहचान की गई। इनमें से 1,692 शिक्षार्थी शिक्षण-अधिगम गतिविधियों में सक्रिय रूप से लगे हुए थे। इस हिसाब से मिजोरम ने पूर्ण साक्षरता का आंकड़ा पार कर लिया है। अर्थात भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा परिभाषित 95% से अधिक साक्षरता दर (जिसे पूर्ण साक्षरता के बराबर माना जाता है)। 2023-24 के लिए पीएफएलएस सर्वेक्षण के अनुसार भी मिजोरम की साक्षरता दर 98.20% है। सामुदायिक भावना का उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए 292 स्वयंसेवी शिक्षकों ने इस पहल का नेतृत्व किया। इनमें छात्र, शिक्षक, रिसोर्स पर्सन और सीआरसीसी शामिल थे। कर्तव्य बोध की गहरी भावना और मिजो सांस्कृतिक मूल्य से प्रेरित होकर इन स्वयंसेवकों ने पूर्ण साक्षरता हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आइजोल में मिजोरम विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित यह उत्सव समावेशी शिक्षा को आगे बढ़ाने और साक्षरता से प्रत्येक नागरिक को सशक्त बनाने में मिजोरम के लोगों और सरकार के सहयोगात्मक प्रयासों का एक शक्तिशाली प्रमाण है।

उल्लास - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम या न्यू इंडिया साक्षरता कार्यक्रम (एनआईएलपी) एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जो 2022-2027 तक लागू है। एनईपी 2020 के अनुरूप यह योजना उन वयस्कों (15 वर्ष और उससे अधिक आयु के) को लक्षित करती है जो स्कूल नहीं जा सकते। इस योजना के पांच घटक हैं, जिनमें आधारभूत साक्षरता और संख्या का ज्ञान, महत्वपूर्ण जीवन कौशल, बुनियादी शिक्षा, व्यावसायिक कौशल और सतत शिक्षा शामिल हैं। उल्लास योजना का उद्देश्य भारत के जन-जन को साक्षर बनाना है और यह कर्तव्य बोध की भावना पर आधारित है तथा इसे स्वैच्छिकता के आधार पर क्रियान्वित किया जा रहा है। उल्लास योजना के अंतर्गत अब तक देश भर में 1.77 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी (नव साक्षर) आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक मूल्यांकन परीक्षा (एफएलएनएटी) में शामिल हो चुके हैं। उल्लास मोबाइल ऐप पर 2.37 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी और 40.84 लाख स्वयंसेवी शिक्षक पंजीकृत हैं। इससे पहले 24 जून 2024 को लद्दाख पूर्ण साक्षरता घोषित करने वाली पहली प्रशासनिक इकाई बनी थी।

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