04/06/26

मोहाली NIA कोर्ट का बड़ा फैसला: आतंकी संगठन AGH से जुड़े 3 कश्मीरी छात्रों को 10-10 साल की सजा

मोहाली, 4 जून (अन्‍नू): पंजाब की मोहाली स्थित विशेष एनआईए (NIA) अदालत ने देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के एक गंभीर मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन 'अंसार गजवत-उल-हिंद' (AGH) से जुड़े तीन कश्मीरी छात्र आतंकियों को 10-10 साल की कैद की सजा सुनाई है. दोषियों में कश्मीर का रहने वाला यासिर रफीक भट भी शामिल है, जो खूंखार आतंकी जाकिर मूसा का चचेरा भाई है. वहीं, इस मामले के एक अन्य आरोपी सुहैल अहमद भट को अदालत साक्ष्यों के अभाव में पहले ही बरी कर चुकी है.

अदालत ने 1 जून को तीनों को देश के खिलाफ साजिश रचने, गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA), आर्म्स एक्ट और एक्सप्लोसिव एक्ट के तहत दोषी करार दिया था. आज इन सभी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जेल से कोर्ट में पेश किया गया, जहां इन्हें सजा सुनाई गई.

जालंधर के सीटी इंस्टीट्यूट के हॉस्टल से हुई थी गिरफ्तारी

यह पूरा मामला करीब 8 साल पुराना है. पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि जालंधर के सीटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी कॉलेज में पढ़ने वाले कुछ कश्मीरी छात्र हॉस्टल में रहकर बड़ी आतंकी साजिश रच रहे हैं. इस सूचना पर 10 अक्टूबर 2018 को पुलिस ने हॉस्टल के एक कमरे में छापेमारी की और तीन छात्रों को गिरफ्तार किया.

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:

  • यासिर रफीक भट: पुलवामा के नूरपोरा का रहने वाला यह आरोपी कुख्यात आतंकी संगठन 'अंसार गजवत-उल-हिंद' के मारे जा चुके प्रमुख जाकिर मूसा का चचेरा भाई है.

  • जाहिद गुलजार: यह दक्षिण कश्मीर के अवंतीपोरा का रहने वाला है और जालंधर के इसी कॉलेज से बी.टेक (B.Tech) की पढ़ाई कर रहा था.

  • मोहम्मद इदरीस शाह: यह पुलवामा जिले का रहने वाला है. ये तीनों आरोपी बचपन से आपस में पुराने दोस्त थे और पुलवामा के नूरपोरा सीनियर हाई स्कूल में एक साथ पढ़ते थे.

गिरफ्तारी के वक्त पुलिस ने इनके कब्जे से एक एके-47 (AK-47) राइफल, एक .30 बोर माउजर पिस्टल, भारी मात्रा में जिंदा कारतूस और करीब एक किलोग्राम विस्फोटक पाउडर (अमोनियम नाइट्रेट मिश्रण) बरामद किया था.

टेलीग्राम चैट्स और फॉरेंसिक डेटा बने जांच का मुख्य आधार

मामले में आतंकी लिंक और घाटी के संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (AGH) का हाथ सामने आने के बाद गृह मंत्रालय ने इस केस की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी थी. एनआईए ने विस्तृत जांच के बाद मोहाली की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की.

जांच को पुख्ता करने के लिए एनआईए ने वैज्ञानिक सबूतों, मोबाइल फॉरेंसिक डेटा और टेलीग्राम मैसेंजर के चैट्स को अपना प्रमुख आधार बनाया. जांच में यह पूरी तरह साबित हुआ कि ये छात्र पढ़ाई के बहाने पंजाब के कॉलेजों में स्लीपर सेल और हथियारों की सप्लाई चेन के रूप में काम कर रहे थे और आपस में बातचीत के लिए टेलीग्राम ऐप का इस्तेमाल करते थे.

पिता सहित 3 गवाह हुए होस्टाइल, 'इस्लामोफोबिया' की दलील खारिज

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने अपना पक्ष मजबूत करने के लिए अदालत के सामने 62 गवाह पेश किए. हालांकि, सुनवाई के दौरान एनआईए को तब झटका लगा जब तीनों मुख्य आरोपियों के पिता (मोहम्मद रफीक भट, अब्दुल कय्यूम शाह और गुलजार अहमद राथर) अदालत में अपने पहले दिए बयानों से मुकर गए, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 'होस्टाइल विटनेस' (Hostile Witness) घोषित कर दिया था.

बचाव पक्ष के रूप में इन आरोपियों ने अदालत में खुद को बेकसूर बताते हुए अजीबोगरीब दलील दी कि वे 'इस्लामोफोबिया' के शिकार हुए हैं और अमेरिका द्वारा बनाए गए वैश्विक माहौल के कारण उन्हें इस केस में फंसाया गया है. हालांकि, विशेष अदालत ने वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आगे उनकी इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया.

मकसूदां थाने पर ग्रेनेड हमला और चंडीगढ़ को दहलाने की थी साजिश

जांच में इस बेहद खतरनाक मॉड्यूल को लेकर कई और बड़े खुलासे हुए:

  • थाने पर हमला: सितंबर 2018 में जालंधर के मकसूदां थाने पर जो ग्रेनेड हमला हुआ था, उसे इसी मॉड्यूल के आतंकियों ने अंजाम दिया था.

  • टारगेट पर चंडीगढ़: जाकिर मूसा पंजाब की कानून व्यवस्था बिगाड़ने के लिए भीड़भाड़ वाले प्रमुख ठिकानों, जैसे चंडीगढ़ के सेक्टर-17 और सेक्टर-43 बस स्टैंड को निशाना बनाना चाहता था. कश्मीरी छात्रों का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में धमाके करने के लिए हथियार और बारूद इकट्ठा करने के लिए किया जा रहा था.

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