चंडीगढ़ में नगर निगम के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा: 'फर्जी इंस्पेक्टर' ने वेंडरों से ऐंठे हजारों, डेटा लीक की आशंका ने बढ़ाए सवाल
चंडीगढ़, 18 अप्रैल (अन्नू): चंडीगढ़ में नगर निगम के कर्मचारी बनकर वेंडरों के साथ ठगी करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक शातिर ठग ने खुद को नगर निगम के वेंडर सेल का इंस्पेक्टर बताकर शहर के दर्जनों वेंडरों को अपना शिकार बनाया। आरोपी ने न केवल फर्जी वेंडर लाइसेंस और आईकार्ड तैयार किए, बल्कि हर महीने फीस के नाम पर भी अवैध वसूली जारी रखी। इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब टाउन वेंडिंग कमेटी के सदस्यों ने इसकी शिकायत पुलिस से की।
QR कोड के जरिए वसूली और फर्जीवाड़ा
आरोपी का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। वह वेंडरों से संपर्क कर उन्हें चालान और पेंडिंग लाइसेंस से जुड़ी सटीक जानकारी देता, जिससे पीड़ित आसानी से उसकी बातों में आ जाते थे। आरोपी 'हरजिंदर सिंह शिंदा' के नाम से फर्जी आईकार्ड का इस्तेमाल करता था, जिस पर नगर निगम कमिश्नर के जाली हस्ताक्षर भी मौजूद थे। वह वेंडरों को व्हाट्सएप पर फर्जी लाइसेंस भेजता था और भुगतान के लिए क्यूआर कोड का इस्तेमाल करता था ताकि उसकी पहचान छिपी रहे। मोहम्मद मुनव्वर हुसैन जैसे कई वेंडरों ने इस जालसाजी के कारण हजारों रुपये गंवा दिए।
पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल
टाउन वेंडिंग कमेटी के सदस्य मुकेश गिरी और नवनीत चावला की ओर से एसएसपी और थाना-39 में शिकायत दर्ज कराए चार दिन बीत चुके हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोपी के फर्जी आईकार्ड और अन्य दस्तावेज भी पुलिस को सौंपे हैं, लेकिन इसके बावजूद पुलिस अभी तक आरोपी को गिरफ्तार करने में नाकाम रही है। इस ढीले रवैये ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
डेटा लीक का गंभीर खतरा
इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू वेंडरों का गोपनीय डेटा लीक होना है। आरोपी के पास यह जानकारी थी कि किस वेंडर का चालान कटा है और किसका लाइसेंस पेंडिंग है। इससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि नगर निगम के सिस्टम से वेंडरों की निजी जानकारी बाहर आ रही है। अब जांच इस दिशा में भी की जा रही है कि कहीं इस रैकेट में नगर निगम का कोई अंदरूनी व्यक्ति तो शामिल नहीं है। शहर में खुलेआम चल रहे इस फर्जीवाड़े ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और सुरक्षा पर भी बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।
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