हरियाणा में हाई-रिस्क इमारतों के OC नियमों में बड़ा बदलाव: अब लागू होगा 'थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन' मॉडल, सूचीबद्ध आर्किटेक्ट्स देंगे हरी झंडी
चंडीगढ़, 24 जुलाई (अन्नू): हरियाणा सरकार ने प्रदेश में ऊंची और हाई-रिस्क इमारतों (High-Risk Buildings) के ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (Occupation Certificate - OC) जारी करने की प्रक्रिया में एक क्रांतिकारी और बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब केवल विभागीय व सरकारी निरीक्षण पर निर्भर रहने के बजाय 'थर्ड-पार्टी सर्टिफिकेशन मॉडल' लागू किया जाएगा।
नगर तथा ग्राम आयोजना विभाग (Town and Country Planning Department) ने इसके लिए अनुभवी और सूचीबद्ध (Empaneled) आर्किटेक्ट्स के माध्यम से भवनों का तकनीकी सत्यापन कराने की व्यवस्था शुरू कर दी है। इन प्राइवेट और अधिकृत आर्किटेक्ट्स के सर्टिफिकेट के आधार पर ही विभाग ओसी जारी करने की कार्रवाई को आगे बढ़ाएगा।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा, प्रक्रिया होगी पारदर्शी व समयबद्ध
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से ओसी जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और अनचाही देरी से मुक्ति मिलेगी:
रेगुलेटरी रिफॉर्म्स: ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) के तहत निर्माण क्षेत्र में अनावश्यक औपचारिकताओं को खत्म करने के लिए यह पहल की गई है।
बिल्डरों को राहत: विभागीय निरीक्षण में लगने वाले लंबे समय से मुक्ति मिलेगी और तय समयसीमा के भीतर ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
मुख्य नगर योजनाकार की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समिति चुनेगी आर्किटेक्ट्स
थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन के लिए विभाग पात्र आर्किटेक्ट्स का एक मजबूत पैनल तैयार करेगा:
ऑनलाइन आवेदन: आर्किटेक्ट्स से आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।
5 सदस्यीय कमेटी: इसके लिए गठित चयन समिति की अध्यक्षता मुख्य नगर योजनाकार (हरियाणा) करेंगे। यह समिति आवेदनों की पात्रता जांचने के बाद ही योग्य विशेषज्ञों को पैनल में शामिल करेगी।
सख्त पात्रता मानक: 5 साल का अनुभव और 5 प्रोजेक्ट अनिवार्य
हर आर्किटेक्ट को इस संवेदनशील कार्य का अधिकार नहीं दिया जाएगा। इसके लिए कड़े मानदंड तय किए गए हैं:
सीओए पंजीकरण: 'काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर' (COA) में वैध रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
अनुभव: हाई-रिस्क भवनों के डिजाइन और निर्माण का कम से कम 5 वर्षों का अनुभव आवश्यक है।
ट्रैक रिकॉर्ड: हरियाणा में कम से कम 5 हाई-रिस्क परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी करने का पिछला रिकॉर्ड होना अनिवार्य है।
विभागीय बोझ घटेगा, तय होगी सीधी जवाबदेही
अब तक केवल विभागीय अधिकारियों के तकनीकी निरीक्षण ही ओसी का मुख्य आधार होते थे, जिससे मामलों का अंबार लग जाता था। नई व्यवस्था से:
विभाग पर पेंडिंग फाइलों का बोझ काफी हद तक कम होगा।
बिल्डरों और बायर्स को समय पर पजेशन (Occupancy) मिल सकेगी।
गलत सर्टिफिकेशन की स्थिति में संबंधित आर्किटेक्ट्स की तकनीकी और कानूनी जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय होगी।
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