04/06/26

दिल्ली पुलिस को बड़ी कामयाबी: 21 साल से फरार ₹30,000 का इनामी डकैत गिरफ्तार, यूपी पुलिस की कस्टडी से हुआ था फरार

नई दिल्ली, 4 जून (अन्‍नू): दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (WR-II) की टीम ने अंतरराज्यीय स्तर पर आतंक का पर्याय बने और पिछले 21 वर्षों से कानून की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहे एक शातिर डकैत को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है. गिरफ्तार किए गए आरोपी पर हरियाणा और उत्तर प्रदेश (UP) पुलिस द्वारा कुल ₹30,000 का इनाम घोषित किया गया था.

दिल्ली पुलिस द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान 60 वर्षीय धर्मपाल उर्फ धर्मपाल बावरिया उर्फ धर्म सिंह उर्फ धर्म चंद उर्फ पेटू बावरिया (निवासी: गाजियाबाद, महेंद्रगढ़ व दिल्ली) के रूप में हुई है, जो कुख्यात 'हवा सिंह बावरिया गैंग' का एक प्रमुख सदस्य है. क्राइम ब्रांच के डीसीपी (DCP) हर्ष इंदोरा (IPS) के निर्देशानुसार और एसीपी राजपाल डबास के करीबी पर्यवेक्षण में इंस्पेक्टर सतीश मलिक, एसआई राजबीर सिंह और हेड कांस्टेबल भंवर सहित अन्य पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से जाल बिछाकर आरोपी को बहल (जिला भिवानी, हरियाणा) से धर दबोचा.

अम्बाला की अदालत में पेशी के दौरान यूपी पुलिस की कस्टडी से हुआ था फरार

प्रेस रिलीज के अनुसार, आरोपी धर्मपाल के खिलाफ हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में डकैती, लूट और चोरी के 11 गंभीर मामले दर्ज हैं. आरोपी को सबसे पहले वर्ष 1998 में गोहाना (सोनीपत) पुलिस ने गिरफ्तार किया था. इसके बाद वह लगातार वारदातों को अंजाम देता रहा.

वर्ष 2005 में, जब उत्तर प्रदेश पुलिस उसे अंबाला (हरियाणा) की एक अदालत में पेशी के बाद वापस लखनऊ जेल ले जा रही थी, तब आरोपी धर्मपाल मुख्य सरगना हवा सिंह के साथ रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ का फायदा उठाकर पुलिस हिरासत से फरार हो गया था. इस संबंध में लखनऊ के आलमबाग थाने में मुकदमा दर्ज है, जिसमें यूपी पुलिस ने उस पर ₹10,000 का इनाम रखा था. इसके अलावा, थाना सिटी नारनौल (हरियाणा) के डकैती के एक मामले में हरियाणा पुलिस द्वारा उस पर ₹20,000 का इनाम घोषित किया गया था, जबकि अम्बाला के पड़ाव थाने के एक मामले में उसे वर्ष 2004 में ही 'भगोड़ा' (PO) घोषित कर दिया गया था.

पहचान बदलकर भिवानी के गांव में करने लगा था खेती

क्राइम ब्रांच की पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि उसका गैंग मुख्य रूप से दिल्ली, हरियाणा, यूपी और राजस्थान में इलेक्ट्रॉनिक सामानों और कीमती सामानों के गोदामों व ट्रांसपोर्टरों को निशाना बनाता था. ये लोग रात के समय ट्रकों में आते थे, सुरक्षा गार्डों को बंधक बनाकर लूटपाट करते थे और चोरी का माल दूसरे राज्यों में बेच देते थे.

पुलिस कस्टडी से फरार होने के बाद, गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार अपनी पहचान, नाम और रहने के ठिकाने बदलता रहा. वह दिल्ली और हरियाणा में फर्जी नामों से किराए के मकानों में रहने लगा. पिछले कुछ समय से वह हरियाणा के बहल क्षेत्र में "धर्म चंद" नाम अपनाकर रहने लगा था और कानूनी एजेंसियों की नजरों से पूरी तरह छिपकर खेती-बाड़ी का काम करने लगा था. दिल्ली पुलिस की इस मुस्तैद कार्रवाई से दो दशकों से फरार चल रहे एक आदतन और खूंखार अंतरराज्यीय अपराधी को अंजाम तक पहुंचाया जा सका है.

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